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काबुल में अफ़ग़ान पत्रकारों का प्रदर्शन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान के सबसे बड़े निजी टेलीवीज़न स्टेशन पर छापा मारे जाने के ख़िलाफ़ करीब सौ अफ़गान पत्रकारों ने संसद के बाहर प्रदर्शन किया है. देश के एटॉर्नी जनरल अब्दुल जबार साबित ने टोलो टीवी के काबुल स्थित मुख्यालय पर पुलिस को छापा मारने के निर्देश दिए थे. विवाद के केंद्र में हैं टोलो टीवी के एक पत्रकार हामिद हैदरी. उन्होंने कहा था कि अब्दुल जबार साबित ने बयान दिया है कि देश की न्यायिक प्रणाली ठीक से काम नहीं कर रही. इसी पत्रकार की तलाश में टीवी के मुख्यालय पर छापा मारा गया. टोलो टीवी का कहना है कि एटॉर्नी जनरल ने बयान दिया था और उसके पास फ़ुटेज भी है जिसमें अब्दुल जबार साबित ये बात कह रहे हैं. माना जा रहा है कि छापे में करीब 50 पुलिसकर्मियों ने हिस्सा लिया. छापे के ख़िलाफ़ हुई रैली में हिस्सा लेने आई पूर्व पत्रकार और सांसद शुक्रिया बराकज़ई ने रॉयटर्स से कहा, "छापा मारने का क़दम क़ानून और संविधान के ख़िलाफ़ था." संवाददाताओं का कहना है कि स्वतंत्र मीडिया को परेशान करने की आशंकाओं को इस घटना से बल मिला है. ये आशंका भी जताई जा रही है कि संसद में जिस नए मीडिया क़ानून पर बहस होने वाली है, वो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अकुंश लगाएगा. तालेबान ने भी कई पत्रकारों को निशाना बनाया है. कुछ दिन पहले तालेबान ने कहा था कि उसने अगवा किए गए अफ़ग़ान पत्रकार अजमल नक्शबंदी की हत्या कर दी है. | इससे जुड़ी ख़बरें जोन्सटन की रिहाई के लिए याचिका13 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना 'अफ़ग़ान नागरिक हिंसा से ज़्यादा पीड़ित'16 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस फ़्रांसीसी बंधकों का वीडियो जारी14 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस तालेबान ने 'अफ़ग़ान पत्रकार की हत्या की'08 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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