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40 किलो चावल यानी 30 बरस मज़दूरी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार राज्य सरकार के अधिकारी एक ऐसे मामले की जाँच कर रहे हैं जिसमें 40 किलो चावल के बदले एक व्यक्ति को लगभग 30 वर्ष तक बंधुआ मज़दूरी करनी पड़ी. राज्य सरकार के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामले देखने को नहीं मिलते और इस संदर्भ में भू-स्वामी पर कार्रवाई की जाएगी. हालांकि बंधुआ मज़दूरी के ख़िलाफ़ काम कर रहे एंटी-स्लेवरी इंटरनेशनल का कहना है कि यह एक अकेला मामला नहीं है बल्कि ऐसा पूरे भारत भर में हो रहा है. ग़ौरतलब है कि वर्ष 1976 में लागू किए गए बंधुआ मज़दूरी निषेध क़ानून के बाद भारत में बंधुआ मज़दूरी को ग़ैर क़ानूनी घोषित कर दिया गया था. हालांकि संस्था का कहना है कि अभी भी लाखों पुरुष, महिलाएँ और बच्चे बंधुआ मज़दूरी करने के लिए बाध्य हैं. लगभग तीन दशक... जवाहर मांझी एक खेतिहर मज़दूर हैं और बिहार राज्य के एक गाँव पाईपुरा बरकी में अपनी पत्नी और चार बेटों के साथ रहते हैं.
लगभग तीन दशक पहले उन्होंने अपने घर में एक शादी के कार्यक्रम के लिए गाँव के भू-स्वामी से 40 किलो चावल उधार लिया था. तय हुआ था कि बदले में वो भू-स्वामी के खेतों में काम करेंगे. यह भी तय हुआ कि एक दिन की मज़दूरी एक किलो चावल होगी और इस तरह कर्ज़ चुकाया जाएगा. पर चावल का कर्ज़ चुकता नहीं हुआ और उन्हें नहीं मालूम कि वो इसके बदले में कितना काम कर चुके हैं. जवाहर बताते हैं कि उनसे कर्ज़ से मुक्त होने के लिए लगभग 5000 रूपए की माँग की गई पर वो इतनी रक़म नहीं जुटा सकते हैं. इस मामले में भू-स्वामी से संपर्क करने की कोशिश भी की गई पर वो उपलब्ध नहीं थे. जब क्षेत्र के ज़िलाधिकारी बीबी राजेंद्र से जब इस बारे में मालूमात की तो उन्होंने कहा कि वो पूरे मामले की पड़ताल कर रहे हैं और अगर ऐसा हुआ है तो कार्रवाई की जाएगी. | इससे जुड़ी ख़बरें बाल मज़दूरी पर नया सरकारी प्रस्ताव22 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बाल मज़दूरों को रखना हुआ ग़ैरक़ानूनी09 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस बाल मज़दूरी का अर्थशास्त्र06 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस मज़दूरों को जूते बाँट रही है सरकार15 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस काँचिपुरम के बंधुआ बाल मज़दूर06 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस नए ज़माने में भी ग़ुलामी का जीवन26 नवंबर, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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