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शुक्रवार, 16 मार्च, 2007 को 12:41 GMT तक के समाचार
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पाकिस्तान में असंतोष बढ़ा
इफ़्तिख़ार चौधरी
इफ़्तिख़ार चौधरी ने ऐसे मामले उठाए जिनमें सरकार को कठघरे में खड़ा किया गया था.
पाकिस्तान के निलंबित मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिखार चौधरी के समर्थन में देशव्यापी प्रदर्शनों से असंतोष बढ़ता नज़र आ रहा है और पुलिस ने विभिन्न शहरों में प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बल प्रयोग के साथ-साथ आँसू गैस का भी इस्तेमाल किया है.

इस बीच एक निजी टेलीविज़न चैनल जियो टीवी ने अपने प्रसारणों में दावा किया है कि पुलिस ने उनके दफ़्तर पर 'हमला' किया है जिसमें दफ़्तर को काफ़ी नुक़सान पहुँचा है.

पुलिस ने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति रफ़ीक़ तारर को भी नज़रबंद कर दिया है और उन्हें कहीं जाने की इजाज़त नहीं दी गई है.

इन प्रदर्शनों में वकील और विपक्षी नेता हिस्सा ले रहे हैं. विपक्षी इस्लामी गठबंधन एमएमए के नेता क़ाज़ी हुसैन अहमद को गिरफ़्तार किया गया है.

क़ाज़ी हुसैन अहमद और हाफ़िज़ हुसैन अहमद के साथ-साथ कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी पुलिस ने उस समय गिरफ़्तार किया जब वे सुप्रीम कोर्ट की इमारत के पास पहुँच चुके थे.

पिछले सप्ताह राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिखार मोहम्मद चौधरी को निलंबित कर दिया था.

इसके विरोध में देशभर में ख़ासकर वकीलों में भारी नाराज़गी देखी गई.

वकील पिछले कई दिनों से हड़ताल पर हैं और वे मुख्य न्यायाधीश के निलंबन को न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला मान रहे हैं.

शुक्रवार को भी सैकड़ों वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट की तरफ़ मार्च किया, हालाँकि वहाँ भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात थे और सुप्रीम कोर्ट की इमारत के आसपास भारी सुरक्षा इंतज़ाम किए गए.

इस विरोध में विपक्षी दल भी उनका साथ दे रहे हैं और पुलिस ने अनेक विपक्षी नेताओं को भी गिरफ़्तार कर लिया.

सर्वोच्च न्यायिक परिषद इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी के ख़िलाफ़ पद के दुरुपयोग के आरापों की जाँच कर रही है.

विरोध प्रदर्शन

राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने नौ मार्च को मुख्य न्यायाधीश चौधरी को पद का दुरुपयोग करने के आरोप में निलंबित कर दिया था.

वकील
पूरे पाकिस्तान में मुख्य न्यायाधीश के निलंबन के वकील विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं

निलंबन की इस कार्रवाई के ख़िलाफ़ वकीलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी. वकीलों ने इसे गैरक़ानूनी बताते हुए पूरे पाकिस्तान में अदालतों का बहिष्कार किया था.

बीसीसी संवाददाता के मुताबिक़ कई लोगों का मानना है कि मुख्य न्यायाधीश को इसलिए निलंबित किया गया क्योंकि उन्होंने ऐसे मामले उठाए, जिनमें सरकार को ही कठघरे में खड़ा किया गया था.

इनमें कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं के ग़ायब होने के मामले भी हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि इन्हें सुरक्षा बलों ने कथित रूप से हिरासत में रखा था.

सरकार ने आरोपों के कथित दुरुपयोग के बारे में अभी तक सार्वजनिक तौर पर कोई विवरण नहीं दिया है.

वकीलों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, विपक्षी पार्टियों और कुछ जजों ने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के इस क़दम की आलोचना की है और कहा है कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर आघात है.

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