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राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने हमले की निंदा की | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने जियो टीवी के कार्यालय पर पुलिस हमले की कड़ी निंदा की है और और इसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना क़रार दिया है. समाचार एजेंसियों के अनुसार मुशर्रफ़ ने इस घटना के लिए चैनल से माफ़ी मांगी है और कहा है कि यह उनके सरकार के ख़िलाफ किया गया काम है. राष्ट्रपति ने चैनल को हुए नुकसान की भरपाई के आदेश दिए हैं और कहा है कि इस घटना की जांच की जाएगी. जियो टीवी के वरिष्ठ संपादक हामिद मीर को टेलीफ़ोन पर दिए साक्षात्कार में मुशर्रफ़ ने कहा ' यह बहुत अफ़सोसजनक है. यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. मैं कड़े शब्दों में इसकी निंदा करता हूं. ' राष्ट्रपति के अनुसार ऐसे हमले अभिव्यक्ति की आज़ादी के क्षेत्र में उनके द्वारा शुरु की गई सुधार प्रक्रिया के ख़िलाफ हैं. उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान में राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के ही आदेश पर निलंबित किए गए मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी के समर्थन में विरोध प्रदर्शन चल रहा है. इसी की कड़ी में शुक्रवार को जियो टीवी के कार्यालय पर पुलिस हमला हुआ और कार्यालय को काफी नुकसान पहुंचाया गया. घटना के बारे में राष्ट्रपति का कहना था 'यह एक बड़ा हमला है. मैं इसके लिए माफ़ी मांगता हूं. इसके लिए ज़िम्मेदार व्यक्तियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.' जियो टीवी के अनुसार ये हमले पंजाब प्रांत की पुलिस ने किए थे और इस बारे में पूछे जाने पर राष्ट्रपति ने कहा कि इस संबंध में जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा. विरोध प्रदर्शन पूरे पाकिस्तान में निलंबित मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिखार चौधरी के समर्थन में देशव्यापी प्रदर्शनों से असंतोष बढ़ता नज़र आ रहा है और पुलिस ने शुक्रवार को विभिन्न शहरों में प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बल प्रयोग के साथ-साथ आँसू गैस का भी इस्तेमाल किया है. पुलिस ने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति रफ़ीक़ तरार को भी नज़रबंद कर दिया है और उन्हें कहीं जाने की इजाज़त नहीं दी गई है. इन प्रदर्शनों में वकील और विपक्षी नेता हिस्सा ले रहे हैं. विपक्षी इस्लामी गठबंधन एमएमए के नेता क़ाज़ी हुसैन अहमद को गिरफ़्तार किया गया है. क़ाज़ी हुसैन अहमद और हाफ़िज़ हुसैन अहमद के साथ-साथ कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी पुलिस ने उस समय गिरफ़्तार किया जब वे सुप्रीम कोर्ट की इमारत के पास पहुँच चुके थे.
इसके विरोध में देशभर में ख़ासकर वकीलों में भारी नाराज़गी देखी गई. वकील पिछले कई दिनों से हड़ताल पर हैं और वे मुख्य न्यायाधीश के निलंबन को न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला मान रहे हैं. शुक्रवार को भी सैकड़ों वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट की तरफ़ मार्च किया, हालाँकि वहाँ भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात थे और सुप्रीम कोर्ट की इमारत के आसपास भारी सुरक्षा इंतज़ाम किए गए. इस विरोध में विपक्षी दल भी उनका साथ दे रहे हैं और पुलिस ने अनेक विपक्षी नेताओं को भी गिरफ़्तार कर लिया. सर्वोच्च न्यायिक परिषद इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी के ख़िलाफ़ पद के दुरुपयोग के आरापों की जाँच कर रही है. निलंबन की इस कार्रवाई के ख़िलाफ़ वकीलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी. वकीलों ने इसे गैरक़ानूनी बताते हुए पूरे पाकिस्तान में अदालतों का बहिष्कार किया था. बीसीसी संवाददाता के मुताबिक़ कई लोगों का मानना है कि मुख्य न्यायाधीश को इसलिए निलंबित किया गया क्योंकि उन्होंने ऐसे मामले उठाए, जिनमें सरकार को ही कठघरे में खड़ा किया गया था. | इससे जुड़ी ख़बरें इफ़्तिख़ार चौधरी का आरोपों से इनकार13 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान में नाराज़ वकीलों का प्रदर्शन12 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस पाक न्यायाधीश के निलंबन का विरोध 12 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश निलंबित09 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस मुशर्रफ़ अलग-थलग नज़र आ रहे हैं...14 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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