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'गिलानी को विदेश जाने की अनुमति मिले' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हुर्रियत कॉफ़्रेंस के कट्टरपंथी धड़े ने केंद्र सरकार से अपील की है कि सैयद अली शाह गिलानी को कैंसर के इलाज़ के लिए विदेश जाने की अनुमति दी जाए. गिलानी की अगुआई वाले हुर्रियत गुट के प्रवक्ता मोहम्मद अशरफ़ ने सोमवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उन्हें भारतीय डॉक्टरों पर पूरा विश्वास है लेकिन वो अपने नेता के इलाज़ के लिए आधुनिक सुविधाओं का इस्तेमाल करना चाहते हैं. उन्होंने भारत सरकार से मानवीय आधार पर इस माँग को मान लेने की अपील की. गिलानी को गुर्दे का कैंसर है. 77 वर्षीय गिलानी का एक गुर्दा चार साल पहले सर्जरी के ज़रिए निकाल दिया गया था. दिल्ली के अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन समीर कौल ने उन्हें गुर्दे की सर्जरी कराने की सलाह दी थी. उन्होंने कहा था कि हुर्रियत नेता को आगे चल कर गुर्दा प्रत्यारोपण भी करवाना पड़ सकता है. सैयद अली शाह गिलानी के पासपोर्ट की वैधता वर्ष 1981 में ही ख़त्म हो चुकी है और उसके बाद से वो विदेश नहीं गए हैं. बीच में एक बार अस्थायी पासपोर्ट पर उन्होंने हज यात्रा की थी. कई कश्मीरी युवाओं ने गिलानी को अपना गुर्दा दान करने की पेशकश की है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'सैन्य वापसी के बिना संघर्षविराम नहीं'04 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस मीरवाइज़ की सलाह: सरकार को परखें04 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस हुर्रियत के गिलानी गुट में टूट22 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस गिलानी को ओआईसी का निमंत्रण नहीं26 जून, 2005 | भारत और पड़ोस 'भारत ने कश्मीर को विवादित माना'04 जून, 2005 | भारत और पड़ोस बस सेवा पर फ़ैसला ग़लतः गिलानी10 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस श्रीनगर में गिलानी के सहयोगी की हत्या15 सितंबर, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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