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उत्तरप्रदेश में चुनाव तारीख़ों की घोषणा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तरप्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने न लगाए जाने की अटकलों और राजनीतिक खींचतान के बीच चुनाव आयोग ने चुनाव की तारीख़ें घाषित कर दीं. चुनाव आयोग ने कहा है कि राज्य में 403 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव सात चरणों में होंगे. पहले चरण का मतदान सात अप्रेल को होगा और आख़िरी चरण का मतदान आठ मई को होगा. सभी सीटों की मतगणना एक साथ 11 मई को होगी. उल्लेखनीय है कि राज्य विधानसभा का कार्यकाल 14 मई 2007 को ख़त्म हो रहा है और इससे पहले नई विधानसभा का गठन होना है. मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी ने इसकी घोषणा करते हुए कहा है कि नई सरकार के गठन के लिए संवैधानिक औपचारिकताएँ पूरी करने के लिए आयोग ने सभी आवश्यक पहलुओं पर विचार किया और फिर वहाँ चुनाव की तारीख़ें तय की हैं. उन्होंने कहा कि पहले चरण में 62 विधानसभा सींटें चुनाव में जाएँगी. इसके लिए मतदान सात अप्रैल को होगा. दूसरे चरण का मतदान 13 अप्रैल को होगा और इस चरण में 58 सीटों पर मतदान होगा. तीसरे चरण में 57 सीटों के लिए 18 अप्रैल को मतदान होगा. मुख्य चुनाव आयुक्त के अनुसार चौथे चरण में 57 सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान होगा. पाँचवे चरण में 58 सीटों के लिए 28 अप्रैल को चुनाव होंगे. छठें चरण का मतदान तीन मई को होगा और इसमें 52 सीटें होंगी जबकि आख़िरी और सातवें चरण में 59 सीटों के लिए आठ मई को मतदान होगा. व्यवस्था मुख्य चुनाव आयुक्त ने एक पत्रकारवार्ता में एक सवाल के जवाब में कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा सीटों और मतदान केंद्रों की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य है इसलिए यहाँ के चुनाव सात चरणों में करवाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस राज्य में कुल एक लाख दस हज़ार मतदान केंद्रों की स्थापना की जाएगी. मतदान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से होगा. उन्होंने कहा कि चुनाव के लिए राज्य भर में एक लाख साठ हज़ार सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएँगे जिसमें केंद्रीय बल और सशस्त्रबल शामिल हैं. ग्यारह करोड़ 43 लाख मतदाताओं वाले उत्तरप्रदेश विधानसभा की 403 सीटों में से 89 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं. राजनीति चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में चुनाव तारीख़ों की घोषणा ऐसे समय पर की है जब मुलायम सरकार पर चौतरफ़ा राजनीतिक हमला हो रहा है और राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग हो रही है.
केंद्र में सत्तारूढ़ यूपीए का नेतृत्व कर रही कांग्रेस और उनके सहयोगी एनसीपी, डीएमके सहित कई सहयोगी दल उत्तरप्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की माँग कर रहे थे. हालांकि यूपीए सरकार की सबसे बड़े समर्थक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने इसका विरोध किया था और कहा था कि सरकार का फ़ैसला विधानसभा के भीतर होना चाहिए. भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की माँग कर रही हैं. उल्लेखनीय है कि 14 फ़रवरी को सुप्रीम कोर्ट ने बहुजन समाजवादी पार्टी के उन 13 विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी थी, जो पार्टी छोड़कर समाज पार्टी के समर्थन में आए थे. इसके बाद कांग्रेस और दूसरी पार्टी ने राज्य की मुलायम सिंह सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग शुरु कर दी थी. लेकिन चुनाव की घोषणा ने एकबारगी परिदृश्य को बदल दिया है. हालांकि तकनीकी दृष्टि से केंद्र सरकार अभी भी राष्ट्रपति शासन लगा सकती है. | इससे जुड़ी ख़बरें कांग्रेस ने कहा, मुलायम इस्तीफ़ा दें19 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस 'राजभवन, दिल्ली का हस्तक्षेप उचित नहीं'18 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस 'राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ता यूपी'17 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस उत्तर प्रदेश में छह मंत्रियों का इस्तीफ़ा15 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस बसपा के 13 विधायकों की सदस्यता रद्द14 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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