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युद्ध अपराधियों को माफ़ी पर सहमति | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान की संसद के ऊपरी सदन ने एक ऐसे विवादित विधेयक को मंज़ूरी दे दी है जिसके तहत कई युद्ध अपराधियों को क्षमादान मिल सकेगा. निचले सदन से इस विधेयक को पहले ही मंज़ूरी दी जा चुकी है. इस तरह अब विधेयक को केवल राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिलनी बाकी है. अगर राष्ट्रपति हामिद करज़ई इस विधेयक को वीटो करने के बजाए अपनी सहमति दे देते हैं तो इससे पिछले 30 वर्षों के दौरान युद्ध अपराधों के लिए दोषी पाए गए लोगों को क्षमा मिल सकेगी. इन तीन दशकों के अंतराल में अफ़ग़ानिस्तान ने कई तरह के हमले सहे. सोवियत रूस के दौर में यहाँ कई लोगों की जानें गईं. इसके बाद मुजाहिद्दीन नेताओं और फिर तालेबान शासन के दौरान भी ऐसी कई घटनाएं घटीं जो युद्ध अपराध की श्रेणी में आती हैं. विरोध जहाँ संसद इसे पारित करने के लिए अपनी हरी झंडी दिखा चुकी है वहीं इन अपराधों के भुक्तभोगी इस विधेयक को पारित किए जाने का पुरज़ोर विरोध कर रहे हैं. ग़ौरतलब है कि निचले सदन के कुछ सांसदों ने इस विधेयक के पक्ष में मतदान करने के बाद कहा कि जब वे इसके पक्ष में वोट डाल रहे थे उस वक्त उन्हें नहीं मालूम था कि इसके क्या परिणाम हो सकते हैं. दूसरी ओर इस विधेयक का समर्थन करने वालों का कहना है कि इस विधेयक को अगर लागू नहीं किया जाता है तो संघर्ष और बढ़ेगा. जानकारों का कहना है कि राष्ट्रपति करज़ई भी इस विधेयक के पक्ष में नहीं हैं. युद्ध के इस दौर में केवल काबुल में ही लगभग 80,000 लोगों की जानें गई थीं. इसके अलावा अपहरण और बलात्कार जैसे भी कई अपराध इस दौरान हुए. | इससे जुड़ी ख़बरें आतंकवाद पर चर्चा करेंगे करज़ई16 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस एक शहर पर तालेबान फिर क़ाबिज़02 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ान सांसदों ने ख़ुद को बचाया31 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस तालेबान अफ़ग़ानिस्तान में 'स्कूल खोलेंगे'23 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस 'हमने बचाकर निकाला ओसामा को'11 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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