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'हथियारबंद' हवाई यात्रा की जाँच के आदेश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
व्यापक सुरक्षा के बावजूद मुंबई हवाई अड्डे से एक उद्योगपति के एक पिस्तौल और तीस कारतूस लेकर दुबई तक हवाई यात्रा करने पर एयर इंडिया ने जाँच के आदेश दिए हैं. ये मामला जाने-माने उद्योगपति नुस्ली वाडिया की मुंबई से दुबई की हवाई यात्रा का है, वे अधिकारियों को बिना बताए अपने साथ अपनी लाइसेंसी पिस्तौल और कारतूस ले गए थे. इस मामले में हवाई अड्डे पर तैनात एक सुरक्षाकर्मी को ड्यूटी से हटा दिया गया है. हवाई यात्रा के सुरक्षा नियमों के मुताबिक हथियार लेकर चलने वाले किसी भी व्यक्ति को विमान में सवार होने से पहले संबंधित एयरलाइन के सुरक्षा अधिकारी को सूचना देनी होती है. विदेश यात्रा करने वाले व्यक्ति को सुरक्षा अधिकारी के साथ-साथ इमिग्रेशन अधिकारी को भी हथियार या अस्ला के बारे में सूचना देनी होती है. लेकिन पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के नाती नुस्ली वाडिया ने अपनी पिस्तौल और कारतूस के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी. ये किस्सा तेरह जनवरी देर रात का है जब दुबई हवाई अड्डे पर अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की, उनका बयान दर्ज किया और पिस्तौल और कारतूस उनके वहाँ रहने तक ज़ब्त कर लिया. लेकिन सवाल ये उठता है कि ये पिस्तौल और कारतूस मुंबई में सुरक्षा अधिकारियों की नज़र से कैसे बच गए और दुबई हवाई अड्डे के अधिकारियों और मशीनों को कैसे चकमा नहीं दे पाए? जाँच के आदेश बीबीसी को प्राप्त जानकारी के अनुसार सुरक्षा में इस ढील के मामले की जाँच के आदेश दे दिए गए हैं और इस मामले से संबंधित एक कर्मचारी को तो ड्यूटी से भी हटा दिया गया है. वाडिया ने मुंबई से एयर इंडिया की उड़ान 717 पकड़ी थी और दुबई तक का सफ़र तय किया था. उनका सामान विशेष स्क्रीनिंग मशीन से भी ले जाया गया था और सिक्योरिटी चेक की मुहर लगाई गई थी. एअर इंडिया की एक उच्च सुरक्षा अधिकारी के अनुसार, "तेरह जनवरी की शाम को ‘सिक्योरिटी लैप्स’ यानि सुरक्षा में ढील का मामला तब दर्ज किया गया जब देर रात एक निजी एअरलाइन के चेयरमैन के बैगेज से तीस गोलियां और एक पिस्टल दुबई एयरपोर्ट से बरामद होने की सूचना मिली. ये सूचना हमारे दुबई के स्टेशन मैनेजर ने दी. हमने तत्काल स्क्रीनिंग करने वाले कर्मचारी को काम पर से हटा दिया है. जाँच की रिपोर्ट आने पर ही हम तय करेंगे कि इसका असली दोषी किसे ठहराया जाए." ये भी जानकारी मिली है कि 13 जनवरी की शाम और रात को दुबई स्थित भारतीय दूतावास और वहाँ स्थित एयर इंडिया के अधिकारी इस मामले को लेकर ख़ासे व्यस्त रहे. जब नुस्ली वाडिया से इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना था," राई का पहाड़ बना दिया गया है. मुझे हिरासत में नहीं लिया गया, मुझसे पूछताछ नहीं हुई है." 'नौकर ने रख दिया था' जब उनसे पूछा गया कि क्या ये ख़बर ग़लत है या सही तब उनका कहना था कि दरअसल पिस्तौल और कारतूस उनके नौकर ने सामान में रख दिए थे और उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी. उनका कहना था, "जब दुबई हवाई अड्डे पर अधिकारियों को ये बताया गया तो उन्होंने मुझे बिठाया, मेरे ख़िलाफ़ मामला दर्ज नहीं किया. उन्होंने पिस्तौल रख ली, मेरे हस्ताक्षर लिए, मेरा बयान लिखा, मुझे रसीद दी और मैं चला गया." नुस्ली वाडिया भारत के जाने-माने उद्योगपतियों में से एक हैं और उन्हें वीआईपी व्यवहार दिया जाता है. जाने-माने उद्योगपति होने के कारण नुस्ली वाडिया का नाम एअर इंडिया की उस सूची में शुमार है जिसमें ‘बड़े लोगों’ के साथ हवाई अड्डों पर ‘विशेष व्यवहार’ होता है. वैसे इस बात पर कुछ लोगों को हैरत ज़रूर हो रही है कि अगर उन्हें बैग में पिस्तौल होने की जानकारी नहीं थी तो उन्होंने दुबई के अधिकारियों को फटाफट लाइसेंस कहाँ से दिखा दिया, क्या वे हमेशा पिस्तौल के लाइसेंस के साथ यात्रा करते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें जिन्ना परिवार से जुड़ सकती हैं ज़िंटा20 सितंबर, 2006 | पत्रिका संदिग्ध विमान यात्री रिहा किए गए24 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना हैरान-परेशान 12 यात्री मुंबई पहुँचे26 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस 'एनटीसी मिलों की ज़मीन बेचना वैध'07 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस एक सस्ती हवाई सेवा24 अगस्त, 2003 | कारोबार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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