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'अनुमति की ज़रूरत नहीं है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फ़ैसले में कहा है कि अब किसी भी पूर्व सांसद, विधायक या मुख्यमंत्री के ख़िलाफ भ्रष्टाचार मामलों में मुक़दमा चलाने के लिए किसी की अनुमति लेने की ज़रुरत नहीं है. कोर्ट ने रेलवे मंत्री लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की याचिकाओं पर यह फ़ैसला दिया है. याचिकाओं में इन नेताओं ने भ्रष्टाचार मामलों में मुक़दमा चलाए जाने की अनुमति को चुनौती दी थी. इस फ़ैसले के बाद लालू प्रसाद के वकील प्रदीप राय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "लालू जी के ख़िलाफ़ कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि उनके ख़िलाफ़ तो मामला चल ही रहा है और इसमें फ़ैसला आना है. उन्होंने तो इसलिए याचिका दायर की थी क्योंकि ऐसी कई और याचिकाएं थीं और वो चाहते थे कि अगर किसी और को राहत मिले तो ऐसा उनके साथ भी हो." फ़ैसले का असर लालू प्रसाद के ख़िलाफ़ मामला पहले से चल रहा है और आगामी 18 दिसंबर को आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में पटना की एक अदालत लालू के ख़िलाफ़ फ़ैसला भी सुनाने वाली है. लालू के वकील प्रदीप राय का कहना है कि यह फ़ैसला भ्रष्टाचार मामलों में कार्रवाई को तेज़ कर देगा. प्रदीय राय ने कहा," देखिए कार्रवाई तो दूर की बात है पहले तो कार्रवाई के बारे में सोचा भी नहीं जाता था. अब कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार के आरोप किसी के कर्त्वय के दायरे में नहीं आते यानी कोई सरकारी बाध्यता नहीं होगी कार्रवाई के लिए. अब तो देश के लिए अच्छी बात हुई है. भ्रष्टाचार के आरोप झेल रहे नेताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई आसान हो जाएगी." हालांकि कोर्ट ने साफ़ कर दिया है कि अनुमति न लेने संबंधी यह फ़ैसला सिर्फ़ और सिर्फ़ भ्रष्टाचार के मामलों तक ही सीमित रहेगा और किसी भी अन्य मामले में अनुमति ज़रुरी होगी. जानकारों का कहना है कि कोर्ट के इस फ़ैसले का असर आने वाले दिनों में कई नेताओं के भविष्य पर पड़ सकता है जिनके ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के आरोप हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें सिद्धू को तीन साल की क़ैद, गिरफ़्तारी अभी नहीं06 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस शिबू सोरेन को आजीवन कारावास05 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'मायावती के ख़िलाफ़ जाँच जारी रहे'27 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'दुरुपयोग बंद करें, फिर राहत का सोचेंगे'15 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस पदोन्नति में आरक्षण जायज़:सुप्रीम कोर्ट19 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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