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'भारत में भी मानव अधिकारों का उल्लंघन' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता ईरान की शिरीन एबादी ने कहा है कि भूख हड़ताल पर बैठी शर्मीला की मृत्यु हुई तो इसकी ज़िम्मेदार भारत की संसद होगी. मणिपुर की इरोम चानू शर्मीला सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून के विरोध में वर्ष 2000 से ही भूख हड़ताल पर हैं. उन्होने तब तक भूख हड़ताल जारी रखने का फ़ैसला किया है जब तक इस विवादास्पद क़ानून को रद्द नहीं किया जाता. शर्मीला के विरोध के चलते उन्हे बंदी बना लिया गया था और उन्हें नाक की नली के ज़रिए भोजन देकर जीवित रखा गया है. शिरीन एबादी ने भारत प्रशासित कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में मानवाधिकारों के उल्लंघन की बात उठाई और शर्मीला की बात करते हुए कहा, "अगर शर्मीला की मृत्यु हुई तो इसकी ज़िम्मेदार भारतीय संसद होगी क्योंकि संसद ने ही ऐसे क़ानून को लागू किया था. ज़िम्मेदार प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भी होंगे क्योंकि उन्होनें इस बारे में नहीं सोचा, ज़िम्मेदार आप पत्रकार भी होंगे क्योंकि शर्मीला की आवाज़ दबी रही". ईरान शिरीन एबादी की इस टिप्पणी पर एक पत्रकार ने सवाल उठाया कि वो किसी दूसरे देश में मानवाधिकार उल्लंघन के बारे कैसे बोल सकती हैं जबकि ख़ुद ईरान में ऐसा होता है तो उन्होंने बेबाकी से कहा “मुझे यह कहने में ज़रा भी संकोच नही है कि ईरान में भी मानवाधिकारों का खुलेआम उल्लंघन होता है”. ईरान के क़ानूनों का हवाला देते हुए उन्होनें कहा, "ईरान में एक पुरूष की गवाही दो महिलाओं के बराबर होती है, एक महिला की क़ीमत एक पुरूष के मुक़ाबले आधी है. एक पुरूष चार पत्नियाँ रख सकता है और यह सब ऐसे देश में हो रहा है जहां के विश्वविद्यालयों में 65 प्रतिशत महिलाएँ पढ़ती हैं". उन्होनें कहा कि मानव अधिकार एक सार्वभौमिक विषय है और यह किसी देश का निजी मामला नही हो सकता. शिरीन आई तो थीं रोली बुक्स और आईडब्लयूपीसी की ओर से महिलाओं के लिए एक कहानी-प्रतियोगिता की शुरुआत करने लेकिन मानवाधिकारों के लिए उनका संघर्ष ही बातचीत का विषय बना रहा. शिरीन की कड़क आवाज और जोशीला अंदाज़ महिला प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में आए सभी पत्रकारों के लिए चर्चा का विषय बन गया. शायद इसका अंदाज़ा शिरीन को भी था इसीलिए अंत में अपने नाम का मतलब बताते हुए उन्होने कहा "चाहे मेरे नाम का मतलब मधुर है लेकिन मेरे शब्दों के बारे में ये सच नही है. अगर मेरे शब्दों से किसी को ठेस पहुँची तो मैं माफ़ी चाहती हूँ". | इससे जुड़ी ख़बरें सेना पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप12 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'मानवाधिकार उल्लंघन' के विरोध में हड़ताल12 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस मानवाधिकार रिपोर्ट में भारत की प्रशंसा18 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में ग्रामीण सुरक्षा बलों की निंदा03 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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