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शुक्रवार, 29 सितंबर, 2006 को 12:28 GMT तक के समाचार
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'वीरूगिरी' से परेशान हैं ख़ुद धर्मेंद्र

धर्मेंद्र
धर्मेंद्र को ख़ुद ही लोगों को वीरूगीरी करने से रोकने के लिए सामने आना पड़ा
हिंदी फ़िल्म ‘लगे रहे मुन्ना भाई ’ ने गाँधीवाद की जगह गाँधीगिरी चला दिया है लेकिन अभिनेता से नेता बने धर्मेंद्र के चुनाव क्षेत्र में सरकारी अधिकारी इन दिनों ‘वीरूगीरी’ से परेशान हैं.

पिछले एक सप्ताह के दौरान राजस्थान के श्रीगंगानगर ज़िले में तीन बार ऐसा हुआ जब लोग अपनी माँगों को लेकर पानी की टंकी पर चढ़ गए और ‘शोले’ फ़िल्म का वीरू वाला दृश्य दोहराने लगे.

इन घटनाओं से तंग आकर श्रीगंगानगर प्रशासन ने लोगों को ख़बरदार किया है कि अगली बार से ऐसे दृश्य प्रस्तुत करने वालों से प्रशासनिक इंतज़ाम और सुरक्षा बलों की तैनाती का ख़र्चा वसूल किया जाएगा.

श्रीगंगानगर ज़िले का एक भाग बीकानेर संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है जहाँ से फ़िल्म अभिनेता धर्मेंद्र सांसद हैं.

इस तरह की घटनाओं ने धर्मेंद्र को भी परेशान कर दिया है क्योंकि 'शोले' फ़िल्म के रोल के विपरीत यहाँ वीरू को ही टंकी पर चढ़े लोगों से उतरने की अपील करनी पड़ी.

भारी मुसीबत

श्रीगंगानगर के ज़िला कलेक्टर कुंजीलाल मीणा ने बीबीसी को बताया कि हाल की तीन घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने ऐसे मामलों में हुए सरकारी ख़र्च का हिसाब तैयार करवाया है.

अपील
 उस दिन धर्मेंद्र राज्य और केंद्र सरकार में ऊँचे पदों पर बैठे लोगों को देर रात तक फ़ोन करते रहे. धर्मेंद्र किसानों की व्यथा से काफ़ी विचलित थे. उनकी पहल पर ही किसान टंकी से उतरे
महावीर पुरोहित, किसान नेता

वे कहते हैं, ‘‘भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा प्रबंधों में हुए ख़र्च की वसूली क़सूरवार लोगों से की जाएगी.’’

पिछले सोमवार को रायसिंह नगर में आठ से ज़्यादा किसान पानी की टंकी पर चढ़ गए और सरसों ख़रीद का भुगतान दिलाने की माँग करने लगे.

सरसों ख़रीद के करोड़ों रुपए लंबे समय से बकाया पड़े हैं और किसान आंदोलन कर रहे हैं.

प्रशासन के हाथ-पाँव फूल गए तो धर्मेंद्र से मदद की गुहार लगाई गई. कई घंटे चले इस नाटक का पटाक्षेप तब हुआ जब धर्मेंद्र ने किसानों से उनकी माँगे मंज़ूर कराने का वादा किया.

किसान नेता महावीर पुरोहित ने बताया, ‘‘ उस दिन धर्मेंद्र राज्य और केंद्र सरकार में ऊँचे पदों पर बैठे लोगों को देर रात तक फ़ोन करते रहे. धर्मेंद्र किसानों की व्यथा से काफ़ी विचलित थे. उनकी पहल पर ही किसान टंकी से उतरे. ’’

इस घटना के बाद पास के सूरतगढ़ में चार लोग एक स्थानीय मुद्दे के लेकर पानी की टंकी पर चढ़ गए. शोले फ़िल्म-सा ही मंजर था. काफ़ी मशक्कत के बाद लोगों को टंकी से उतारा गया.

सूरतगढ़ में शुक्रवार को फिर एक व्यक्ति टंकी पर चढ़ गया और काफ़ी बावेला मचने पर नीचे उतर गया.

प्रशासन ने इन सभी मामलों में आत्महत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया है.

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