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धमाकों के दोषियों को सज़ा सुनाई जाएगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई की विशेष टाडा अदालत 1993 में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में दोषी ठहराए गए चार लोगों के ख़िलाफ़ गुरुवार को सज़ा सुनाएगी. न्यायाधीश पीडी कोडे ने मंगलवार को मामले के 123 अभियुक्तों में से मेमन परिवार के चार सदस्यों को दोषी ठहराया था. अदालत बुधवार को ही सज़ा सुनाने वाली थी लेकिन बचाव पक्ष के वकीलों ने क्या सज़ा दी जाए इस पर बहस के लिए और समय देने की माँग की जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया. ग़ौरतलब है कि मुंबई में 12 मार्च, 1993 को सिलसिलेवार रूप से हुए 12 बम धमाकों में 257 लोगों की मौत हो गई थी और 700 से अधिक लोग घायल हो गए थे. सज़ा सरकारी वकील उज्जवल निकम ने अदालत से दोषियों को फाँसी की सज़ा देने की माँग की है. दूसरी ओर बचाव पक्ष के वकील की दलील है कि उनके मुवक्किल पहले ही 13 साल ज़ेल में बिता चुके हैं और अब उन्हें बरी कर देना चाहिए. दोनों तरफ़ से ज़ारी बहस अधूरी रह जाने के कारण न्यायाधीश ने कहा कि सज़ा पर फ़ैसला गुरुवार को सुनाया जाएगा. गुरुवार को ही आठ अन्य अभियुक्तों को फ़ैसला सुनाया जाएगा. अदालत ने कहा है कि वो अभियुक्तों को आठ आठ के समूह में बाँट कर फ़ैसला सुनाएगी. यह मामला भारतीय क़ानूनी इतिहास के अत्यंत पेचीदा और लंबे मामलों में से एक माना जाता है. इस मामले में एक दशक से अधिक समय तक सुनवाई चली और 686 गवाह पेश हुए और क़रीब दस हज़ार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई. इस मामले में अदालत के फ़ैसले का इंतज़ार न केवल अभियुक्तों को है बल्कि मामले की जांच करने वाली विशेष टास्क फोर्स, सीबीआई और मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को भी है. |
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