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देश-विदेश से 250 ब्लागर चेन्नई पहुँचे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और विदेशों से लगभग 250 ब्लॉगर यानि ब्लॉग लिखने वाले लोग दो दिन के 'ब्लॉगकैंप' के लिए चेन्नई में एकत्र हुए हैं. इंटरनेट पर छापे गए किसी भी व्यक्ति के, किसी भी विषय पर व्यक्त विचार ब्लॉग कहलाते हैं, जिसका पहला नाम वेबलॉग हुआ करता था, लेकिन बिगड़ कर ब्लॉग हो गया है. ये ब्लॉग लिखने वाले लोग यानि ब्लॉगर एक-दूसरे से अपने विचार बाँट रहे हैं. ये सामान्य सम्मेलनों से अलग है क्योंकि इसमें ब्लागरों के अलावा कोई श्रोता या दर्शक नहीं हैं. चेन्नई के एक ब्लॉगर और इस 'ब्लॉगकैंप' के आयोजक एस किरुबा शंकर कहते हैं कि भाग लेने वाले पत्रकारिता, मार्किटिंग और आर्थिक मुद्दों से जुड़े पहलुओं को सीखने की कोशिश में हैं. महत्वपूर्ण है कि 'ब्लॉगकैंप' में भारत के पूर्व कप्तना और प्रख्यात बल्लेबाज़ सुनील गावसकर भी भाग लेंगे क्योंकि उन्होंने पॉडकास्टिंग करते हुए इंटरव्यू किए हैं. आयोजकों ने ज़ोर देकर कहा कि वे क्रिकेट के कारण नहीं बल्कि अन्य कारणों से इस कैंप में आ रहे हैं. एक ब्लागर विग्नेश का कहना था, "इस जमावड़े में ये लोग ब्लॉगिंग और प्रसासन, पॉडकास्टिंग, मोब्लागिंग इत्यादि विषयों पर चर्चा करेंगे." चेन्नई में, देश में अन्य जगहों से काफ़ी पहले, वर्ष 2001 में ही, ब्लागिंग शुरु हो गई थी. अब तो डॉक्टर, वकील, शिक्षक और ज्योतिषी, यानि समाज के अनेक वर्गों के लोग ब्लागिंग करते हैं. एक अध्ययन के अनुसार भारत में सबसे ज़्यादा ब्लागर चेन्नई में हैं. यहाँ तक कि वर्ष 2003 में चेन्नई स्थित अन्ना विश्वविद्यालय ने ब्लागिंग पर एक राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन बुलाया था और विश्वविद्यालय में एक ब्लागिंग का कोर्स भी शुरु किया था. | इससे जुड़ी ख़बरें गूगल ने ऑनलाइन लाइब्रेरी का काम रोका13 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना गूगल के चित्रों से इसरो को चिंता08 जुलाई, 2006 | विज्ञान इस्लामी वेबसाइटों पर साप्ताहिक बुलेटिन02 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना चाभी वाला लैपटॉप सिर्फ़ 100 डॉलर में29 सितंबर, 2005 | विज्ञान चुपके-चुपके फैलता जासूसी का कारोबार07 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस ईबे इंटरनेट कंपनी स्काइप को ख़रीदेगी12 सितंबर, 2005 | कारोबार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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