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सोमवार, 04 सितंबर, 2006 को 11:20 GMT तक के समाचार
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सेक्स स्कैंडल के दो मामले स्थानांतरित
महिला प्रदर्शनकारी
सेक्स स्कैंडल का मामला सामने आने के बाद राज्य भर में विरोध प्रदर्शन हुए थे
भारत की सर्वोच्च अदालत ने जम्मू कश्मीर सेक्स स्कैंडल के दो मामले चंडीगढ़ की ज़िला सत्र अदालत को स्थानांतरित करने का फ़ैसला किया है.

इन दो मामलों में जम्मू कश्मीर सरकार के प्रधान सचिव मोहम्मद इक़बाल खांडे सहित 14 अभियुक्त शामिल हैं.

केंद्रीय जाँच एजेंसी यानी सीबीआई इन मामलों की जाँच पूरी कर चुकी है और श्रीनगर की एक अदालत में आरोप पत्र भी दाख़िल किए जा चुके हैं.

ये पूरा मामला मार्च में तब शुरू हुआ जब एक ग़ैर सरकारी संस्था ने पुलिस को एक सीडी सौंपी जिसमें एक स्थानीय लड़की की अश्लील तस्वीरें थीं.

इस सेक्स स्कैंडल के सामने आने के बाद से श्रीनगर में विश्वविद्यालय के छात्रों, महिला संगठनों और हुर्रियत कॉफ़्रेंस ने कई दिन तक विरोध प्रदर्शन किया था.

सरकारी वकीलों की बार एसोसिएशन भी हड़ताल पर चली गई थी.

अब मुख्य न्यायधीश वाईके सभरवाल की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय खंडपीठ ने इन 14 अभियुक्तों के मुक़दमे जम्मू कश्मीर से बाहर किसी अन्य अदालत को सौंपने की याचिका पर अपना फ़ैसला सुनाया है.

न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश सेक्स स्कैंडल से जुड़े अन्य मामलों में सीबीआई की चल रही जांच में आड़े नहीं आएगा और जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट की निगरानी भी पहले की तरह चलती रहेगी.

इससे पहले इन अभियुक्तों के वकीलों ने न्यायालय को सूचित किया था कि श्रीनगर की अदालत से न्याय की उम्मीद उन्हें बहुत कम है क्योंकि वहाँ का माहौल तनावपूर्ण है.

कोई भी वकील इन अभियुक्तों की पैरवी करने सामने नहीं आया है और जो वकील बाहर से श्रीनगर पहुंचे हैं उन्हें भी धमकाया जा रहा है. अदालत के बाहर बम फटे हैं और अभियुक्तों के बच्चों को इस मामले में अदालत में बहस करनी पड़ रही है.

पिछला आदेश

इस बीच हाईकोर्ट के 11 अगस्त के आदेश के ख़िलाफ़ सीबीआई की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के पूरे आदेश को ध्यान से पढ़ कर अमल करने की ज़रूरत है.

11 अगस्त के आदेश में हाईकोर्ट ने कहा था कि जाँच ब्यूरो को ठोस कदम उठाने चाहिए जिसमें कहा गया था कि ज़रूरत पड़ने पर अभियुक्तों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की जाए.

न्यायालय ने इस मामले में जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के रवैये पर भी कड़ी आपत्ति जताई.

बार एसोसिएशन का आरोप था कि इस मामले में कई प्रभावशाली लोगों को बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं और जाँच ब्यूरो को इस बारे में कार्रवाई की अनुमति नहीं मिल रही है.

न्यायालय ने जब इन आरोपों के आधार पर सवाल करना शुरु किया तो एसोसिएशन के वकील आरए जॉन कोइ संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए.

न्यायालय ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में ऐसे आरोप लगाने से पहले सावधानी बरती जाएगी.

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