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गुरुवार, 24 अगस्त, 2006 को 18:12 GMT तक के समाचार
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विदर्भ में विधवाओं की बढ़ती संख्या

विधवा
इंदिरा जैसी विधवाओं के कंधे पर घर की ज़िम्मेदारी है
इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जब प्रधानमंत्री लालकिले से किसानों की समस्याओं पर बोल रहे थे तब महाराष्ट्र के एक गाँव में कपास उगाने वाले एक किसान ने आत्महत्या कर ली. वह कर्ज़ में डूबा हुआ था.

मनोहर केलकर की आत्महत्या से गाँव के लोग काफ़ी हैरान थे क्योंकि वो ख़ुद इसके विरोध में बोला करते थे.

केलकर की पत्नी इंदिरा अब विदर्भ की उन चार हज़ार विधवाओं में से एक हैं जिनका भविष्य अंधकारमय हो गया है.

उनकी ज़िम्मेदारियों में चार बच्चों की देखभाल और बैंकों-साहूकारों के कर्ज़ों की अदायगी शामिल है.

"मैं मज़दूरी करूँगी लेकिन सरकार को भी कुछ करना चाहिए." इंदिरा ने रोते-रोते कहा.

इंदिरा को राज्य सरकार से एक लाख रूपए का मुआवजा मिलेगा जिसमें से हाथ में केवल 30 हज़ार रूपए ही आएँगे. बाकी पैसे बैंक में जमा हो जाएँगे.

विधवाओं की दशा प्रधानमंत्री ने भी देखी थी जब वह कुछ सप्ताह पहले विदर्भ के दौरे पर आए थे. उन्होंने क्षेत्र के हर कलेक्टर को 50 लाख रुपए देने का फ़ैसला किया ताकि विधवाओं की मदद की जा सके.

भविष्य

यह क़दम इन विधवाओं के आँसू पोछने के लिए शायद काफ़ी हो लेकिन उनके बच्चों की ज़िंदगी बनाने के लिए काफ़ी नहीं.

किशोर तिवारी इन किसानों के अधिकार के लिये 10 साल से संघर्ष करते आ रहे हैं.

वो कहते हैं, "सरकार को चाहिए कि उनकी और उनके बच्चों की पढा़ई की ज़िम्मेदारी ले, सब विधवाओं को नौकरी दे और उनके स्वास्थ्य का भी इंतजाम करे."

किशोर तिवारी
किशोर तिवारी और सरकारी मदद की माँग कर रहे हैं

इंदिरा की परेशानियाँ तो अभी शुरू हुई है. 65 वर्षीय जादव राव के घर में दो विधवाएँ हैं. एक बेटे ने पिछले साल जान दे दी और बड़े बेटे ने सात साल पहले.

सात साल पहले उषा केवल 19 साल की थी और उसके दो बच्चे भी थे. अब वह 26 वर्ष की है. "मेरे दो बच्चे हैं लेकिन कभी कभी सूनापन लगता है". उषा यह शब्द कहते समय रो पड़ती है.

कर्ज़ो में डूबे किसानों की आत्महत्याओं की संख्या बढ़ती ही जा रही है. पिछले साल जून से अब तक 755 किसान आत्महत्या कर चुके हैं. यानी हर 8 घंटे में एक महिला विदर्भ में विधवा हो रही है.

 हम उन्हें आत्महत्या करने से रोकने की कोशिश करते हैं लेकिन यहाँ की औरतों को विधवा होने से बचाना है तो राज्य सरकार को आगे आना पड़ेगा.
विलास रावत

किसानों के स्थानीय नेता विलास रावत कहते हैं, "हम उन्हें आत्महत्या करने से रोकने की कोशिश करते हैं लेकिन यहाँ की औरतों को विधवा होने से बचाना है तो राज्य सरकार को आगे आना पड़ेगा. समाज की भी ज़िम्मेदारी है लेकिन सरकार की ज़िम्मेदारी पहले है."

किशोर तिवारी की दलील है कि सरकार को आर्थिक नीतियाँ बदलनी पड़ेगी तभी यहाँ की औरतों को विधवा होने से बचाया जा सकता है.

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