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मंगलवार, 22 अगस्त, 2006 को 18:56 GMT तक के समाचार
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टीआरएस ने समर्थन वापस लिया
चंद्रशेखर राव
टीआरएस ने पिछला लोकसभा चुनाव तेलंगना को अलग राज्य बनाने के मुख़्य मुद्दे पर लड़ा था
तेलंगाना राष्ट्र समिति यानि टीआरएस ने आंध्रप्रदेश के तेलंगाना क्षेत्र को अलग राज्य का दर्जा देने के मुद्दे पर केंद्र सरकार से समर्थन वापस ले लिया है.

केंद्रीय मंत्रिमंडल में टीआरएस के दोनों मंत्रियों, के चंद्रशेखर राव और ए नरेंद्र ने मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दे दिया. संसद में टीआरएस के पाँच सदस्य हैं.

पार्टी प्रमुख और केंद्र सरकार में श्रम मंत्री के चंद्रशेखर राव ने पत्रकारों से कहा, " हमनें अपना इस्तीफ़ा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भेज दिया है और उनसे इसे स्वीकार करने का अनुरोध किया है."

समाचार एजेंसियों के मुताबिक दिन भर चली राजनीतिक गहमागहमी में केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के सबसे बड़े घटक दल कॉंग्रेस ने टीआरएस को मनाने की पुरजोर कोशिश की लेकिन ये प्रयास कारगर साबित नहीं हो सके.

 हमनें अपना इस्तीफ़ा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भेज दिया है और उनसे इसे स्वीकार करने का अनुरोध किया है
चंद्रशेखर राव

ग़ौरतलब है कि टीआरएस ने पिछले लोकसभा चुनाव में तेलंगाना को अलग राज्य का दर्जा देने के समर्थन में चुनाव लड़ा था और इस माँग को पूरा करने के लिए वह लगातार केंद्र सरकार पर दबाव बनाए हुए था.

प्रधानमंत्री को भेजे गए सात पन्नों के पत्र में चंद्रशेखर राव ने दावा किया है कि लगभग 450 सांसद तेलंगाना को अलग राज्य का दर्जा देने के पक्षधर हैं लेकिन कॉंग्रेस इसमें सबसे बड़ी बाधा साबित हुई है.

झटका

यूपीए से टीआरएस का हटना कॉंग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के लिए एक झटका है. हालाँकि इससे सरकार की सेहत पर कोई ख़ास फ़र्क नहीं पड़ेगा क्योंकि 545 सदस्यीय लोकसभा में अब भी उसे लगभग 300 सदस्यों का समर्थन हासिल है.

इससे पहले तमिलनाडु की अंदरुनी राजनीति के कारण एमडीएमके ने यूपीए से अलग होने का फ़ैसला किया था.

टीआरएस और कॉंग्रेस ने वर्ष 2004 में लोकसभा चुनाव और आंध्रप्रदेश का विधानसभा चुनाव साथ साथ लड़ा था.

तब राज्य में वाईएस राजशेखर रेड्डी की अगुआई में कॉंग्रेस गठबंधन की सरकार बनी थी. लेकिन तेलंगाना के मुद्दे पर ही टीआरएस ने सरकार गठन के कुछ ही समय बाद राज्य सरकार से समर्थन वापस ले लिया था.

चंद्रशेखर राव ने यूपीए से अलग होने के फ़ैसले के बाद तेलंगाना के मसले पर वामपंथी दलों की आलोचना करने के साथ साथ कॉंग्रेस को आड़े हाथों लिया.

उन्होंने कॉंग्रेस पर तेलंगाना के लोगों को 'धोखा' देने का आरोप लगाते हुए कहा कि उसे इसकी 'भारी कीमत' चुकानी होगी.

ग़ौरतलब है कि केंद्र सरकार ने तेलंगाना को अलग राज्य का दर्जा देने के मुद्दे पर रक्षा मंत्री प्रणव मुख़र्जी की अध्यक्षता में एक उपसमिति का गठन किया था लेकिन ये अब तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच पाई है.

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