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सोनिया पर तेलंगाना का फ़ैसला छोड़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी, तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के प्रमुख चंद्रशेखर राव और काँग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह की बुधवार को दिल्ली में बैठक हुई. बैठक के बाद दिग्विजय सिंह ने पत्रकारों को बताया कि तेलंगाना राज्य के संबंध में फ़ैसला यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी के सुपर्द करने पर सहमति हुई है. आध्रं प्रदेश सरकार से टीआरएस के मंत्रियों के इस्तीफ़े वापसी के सवाल पर चंद्रशेखर राव ने कहा कि इस मसले को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा. आंध्र प्रदेश में इस समय कांग्रेस की सरकार है. पहले इस सरकार में उनकी सहयोगी पार्टी टीआरएस भी शामिल थी. लेकिन पिछले दिनों अलग तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर टीआरएस के मंत्रियों ने त्यागपत्र दे दिया था. आंध्र प्रदेश सरकार से टीआरएस के हटने के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह पहली मुलाक़ात है. अलग तेलंगाना राज्य के मसले पर सरकार के रवैये का विरोध करते हुए टीआरएस ने पाँच जुलाई को सरकार से अलग होने का फ़ैसला किया था और सभी छह मंत्रियों ने इस्तीफ़ा दे दिया था. वैसे टीआरएस के नेताओं ने मानना था कि इस मामले को लेकर उनकी पार्टी पर माओवादी नेताओं का दबाव भी है और धमकी दी गई थी कि अगर मंत्री इस्तीफ़ा नहीं देंगे तो उन पर हमला हो सकता है. राजशेखर रेड्डी सोमवार को दिल्ली आ गए थे और इसके बाद उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मुलाक़ात की थी. मुख्यमंत्री रेड्डी की कांग्रेस के प्रभारी महासचिव दिग्विजय सिंह से भी मुलाक़ात हुई थी. वैसे राजशेखर रेड्डी यह माँग कर चुके हैं कि तेलंगाना राज्य के गठन पर विचार करने के लिए दूसरे राज्य पुनर्निर्माण आयोग का गठन किया जाना चाहिए. कांग्रेस और टीआरएस में तेलंगाना राज्य के मसले पर मतभेद हैं. |
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