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लश्करे तैबा के पूर्व प्रमुख नज़रबंद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में अधिकारियों ने सामाजिक धार्मिक संस्था जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफ़िज मोहम्मद सईद को नज़रबंद कर दिया है. अमरीका इसे 'आतंकवादी' संगठन मानता है. हाफ़िज़ मोहम्मद सईद पाँच साल पहले तक चरमपंथी संगठन लश्करे तैबा के मुखिया थे. उस समय पाकिस्तान सरकार ने लश्करे तैबा को प्रतिबंधित कर दिया तो उन्होंने जमात-उद-दावा नाम से नया संगठन खड़ा कर लिया. भारत का भी आरोप है कि यह चरमपंथी संगठन लश्करे तैबा का ही अभिन्न हिस्सा है और मुंबई की रेलगाड़ियों में जुलाई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में भी लश्करे तैबा का ही हाथ था. मुंबई धमाकों में 180 से अधिक लोग मारे गए थे और अनेक घायल हुए थे. नज़रबंद जमात-उद-दावा के एक प्रवक्ता ने बताया कि हाफ़िज मोहम्मद सईद के घर पर पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए हैं. पाकिस्तान सरकार ने लाहौर में अगले हफ़्ते इस संगठन की प्रस्तावित रैली को दी गई अनुमति भी रद्द कर दी है. अमरीका का मानना है कि जमात-उद-दावा का काम लश्करे तैबा के लिए धन इकठ्ठा करना है और दोनों संगठनों के संबंध दुनिया के कई धार्मिक चरमपंथी संगठनों से हैं. ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान सरकार ने लश्करे तैबा को तो प्रतिबंधित कर दिया है लेकिन यह प्रतिबंध जमात-उद-दावा पर लागू नहीं होता है. भारत का दबाव मुंबई धमाकों के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ चल रही शांति वार्ता को स्थगित करते हुए पाकिस्तान सरकार से चरमपंथी संगठनों और उन्हें धन देने वाले संगठनों पर शिकंजा कसने की माँग की थी. इस्लामाबाद स्थित बीबीसी संवाददाता डैन आईज़ाक्स के मुताबिक हाफ़िज सईद को नज़रबंद करने और जमात-उद-दावा की रैली को प्रतिबंधित करने का संबंध निश्चित रूप से भारत और अमरीका की ओर से बढ़े दबाव से है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'हमलों की योजना बना रहा है लश्कर'31 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस प्रमुख 'लश्कर चरमपंथी' गिरफ़्तार 22 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस वाराणसी विस्फोट: लश्कर पर संदेह09 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 'मदद के लिए तैयार' मुशर्रफ़14 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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