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'लाभ का पद' विधेयक लोकसभा में पारित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय संसद के निचले सदन लोकसभा ने लाभ के पद संबंधी विवादास्पद विधेयक को इसके मूल रुप में पारित कर दिया है. इसके साथ ही इसे संसद के दोनों सदनों की मंज़ूरी मिल गई है. लोकसभा में लंबी बहस के बाद मंगलवार को ये विधेयक 71 के मुक़ाबले 230 मतों से पारित हो गया. राज्यसभा में ये विधेयक गुरुवार को पारित हो चुका है. संसद के दोनों सदनों की मंज़ूरी मिलने के बाद विधेयक को एक बार फिर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा. ग़ौरतलब है कि मई में संसद के दोनों सदनों ने इस विधेयक को पारित कर दिया था. लेकिन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने इसे अपनी टिप्पणियों के साथ वापस भेजते हुए कैबिनेट से पुनर्विचार करने को कहा था. हालाँकि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस विधेयक को एक बार फिर उसके पुराने स्वरुप में ही संसद में पेश किए जाने का फ़ैसला किया. विरोध भाजपा के नेतृत्व वाले प्रमुख विपक्षी गठबंधन एनडीए ने राष्ट्रपति की सलाह के बावजूद विधेयक को ज्यों का त्यों पुराने रुप में ही सदन में रखे जाने का विरोध किया. भाजपा नेता अनंत कुमार ने लोकसभा में कहा कि विधेयक को महज कुछ सांसदों के हित में पारित नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर व्यापक क़ानून बनाने की माँग की. विधि मंत्री हंसराज भारद्वाज और कॉंग्रेस सांसद कपिल सिब्बल ने विपक्ष की आपत्तियों को ख़ारिज करते हुए विधेयक को तर्कसंगत करार दिया. सिब्बल ने कहा कि विधेयक संविधान की धारा 102 के अनुरुप है जिसमें सांसदों को अयोग्य ठहराने के कारणों की चर्चा की गई है. विधेयक में राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के अध्यक्ष समते कोई 56 पदों को लाभ के पद के दायरे से बाहर रखा गया है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'लाभ के पद' का विधेयक फिर पारित28 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस 'लाभ का पद' विधेयक फिर पेश होगा22 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस जया बच्चन निर्विरोध पहुँची राज्यसभा08 जून, 2006 | भारत और पड़ोस भारतीय राष्ट्रपति ने विधेयक लौटाया30 मई, 2006 | भारत और पड़ोस विधेयक का विरोध करने का फ़ैसला15 मई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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