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'लाभ के पद' का विधेयक फिर पारित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
'लाभ के पद' का विवादित विधेयक गुरुवार को एक बार फिर राज्यसभा में ज्यों का त्यों पारित कर दिया गया. भाजपा के नेतृत्व वाले प्रमुख विपक्षी गठबंधन एनडीए ने इसका तीखा विरोध किया. इस विधेयक को एक बार संसद के दोनों सदनों ने मई में पारित कर दिया था. लेकिन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने अपनी टिप्पणियों के साथ वापस भेजते हुए इस पर पुनर्विचार करने को कहा था. लेकिन केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस विधेयक को एक बार फिर उसके पुराने स्वरुप में ही संसद में पेश किए जाने का फ़ैसला किया था. इस विधेयक में कोई 56 पदों को लाभ के पद की परिभाषा से अलग रखने की बात कही गई है. विपक्षी दलों का आरोप है कि इस विधेयक के ज़रिए केंद्र की यूपीए सरकार यूपीए चेयरपर्सन और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को बचाने का प्रयास कर रही है. राष्ट्रपति ने इस विधेयक को लौटाते हुए कहा था कि कौन से पद लाभ के पद की परिधि में नहीं आते हैं, इसे तय करते समय निष्पक्षता का ध्यान रखना चाहिए. उन्होंने कहा था कि यह भी ध्यान रखना चाहिए कि यह विधेयक जिसे केंद्र सरकार ने पारित किया था, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी समान और पारदर्शी तरीके से लागू हो सके. हालांकि इस विधेयक पर हुई बहस का जवाब देते हुए क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने कहा है कि राष्ट्रपति के सुझावों की अवमानना करने का कोई प्रश्न ही नहीं है. उन्होंने कहा, "लोकतंत्र में संसद की अवहेलना नहीं की जा सकती." संविधान के अनुसार यदि संसद के दोनों सदन किसी विधेयक को दोबारा ज्यों का त्यों भी पारित करें और सरकार फिर इसे राष्ट्रपति के पास भेज दे तो राष्ट्रपति के लिए इसे मंज़ूरी देना बाध्यकारी होता है. राष्ट्रपति की मंज़ूरी के बाद की ही किसी विधेयक तो क़ानून का रुप दिया जा सकता है. कई मामले उल्लेखनीय है कि समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन को लाभ के पद पर होने के आरोप में सदस्यता के अयोग्य करार दिया था और उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा था. इसके बाद यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गाँधी और लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी समेत कई सांसदों के ख़िलाफ़ लाभ के पद पर होने की शिकायतें की गई थी. सोनिया गाँधी ने तो लोकसभा की सदस्यता और कई संस्थाओं के प्रमुख पद से इस्तीफ़ा देते हुए फिर चुनाव लड़ा और लोकसभा में दोबारा लौटीं लेकिन शेष सांसदों का मामला अभी भी इस विधेयक के सहारे लटका हुआ है. इसके अलावा कई राज्यों के विधायकों को लेकर ढेरों शिकायतें चुनाव आयोग से की गई हैं. राज्यसभा से पारित होने के बाद इसे लोकसभा में रखा जाएगा. | इससे जुड़ी ख़बरें 'लाभ का पद' विधेयक फिर पेश होगा22 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस जया बच्चन निर्विरोध पहुँची राज्यसभा08 जून, 2006 | भारत और पड़ोस 'लाभ के पद' को लेकर राजनीति तेज़01 जून, 2006 | भारत और पड़ोस मंत्रिमंडल में 'लाभ के पद' पर विचार31 मई, 2006 | भारत और पड़ोस भारतीय राष्ट्रपति ने विधेयक लौटाया30 मई, 2006 | भारत और पड़ोस लाभ का पद संबंधी विधेयक पारित हुआ16 मई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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