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मट्टू मामले में सुनवाई 31 अगस्त को | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रियदर्शिनी मट्टू मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो की अपील की जल्द सुनवाई की अर्ज़ी दाख़िल कर ली है. दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा मट्टू की वर्ष 1996 में बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी. उस समय प्रियदर्शिनी 23 साल की थीं. हत्याकांड के मुख्य अभियुक्त संतोष कुमार सिंह को 1999 में सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था. संतोष एक वकील है और भारतीय पुलिस सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी के पुत्र हैं. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश आरएस सोढी और पीके भसीन ने जल्द सुनवाई के अनुरोध को मानते हुए मामले की सुनवाई 31 अगस्त के लिए रखी है. सीबीआई का कहना है कि निचली अदालत ने वैज्ञान और चिकित्सा के आधार पर जुटाए सबूतों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया. सीबीआई का ये भी कहना है कि परिस्थितियों के आधार पर जुटाए सबूतों को भी नज़रअंदाज़ किया गया. जनता का दबाव महत्वपूर्ण है कि सीबीआई की जल्द सुनवाई की अर्ज़ी तब आई है जब जनता और मीडिया ने इस मामले में दोबारा जाँच के लिए दबाव बढ़ाया है. सबसे पहले उनके मित्रों और सहपाठियों समेत कई छात्रों ने प्रियदर्शिनी मट्टू हत्या मामले में नए सिरे से जाँच की माँग करते हुए विरोध प्रदर्शन किए थे. सबसे पहले हुए विरोध प्रदर्शन में दिल्ली विश्वविद्यालय के क़ानून विभाग के सौ से ज़्यादा छात्रों ने भाग लिया. छात्रों का कहना है कि जनदबाव बना कर प्रियदर्शिनी मट्टू हत्या मामले की जाँच नए सिरे से कराई जा सकेगी. उसके बाद ये मामला मीडिया ने ज़ोरदार तरीके से उठाया. इस मामले में दोबारा जाँच की माँग करने वाले गुट जस्टिस फॉर प्रियदर्शिनी ने उच्च न्यायालय के आदेश का स्वागत किया है लेकिन ये भी कहा है कि उनकी माँग पूरे मामले की दोबारा जाँच की है. | इससे जुड़ी ख़बरें मनु शर्मा, सात अन्य को ज़मानत मिली18 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस सभी नौ अभियुक्तों के ख़िलाफ़ वारंट22 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस जेसिका हत्याकांड की नए सिरे से जाँच06 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस जेसिका मामले में पुलिस को नोटिस24 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस जेसिका लाल हत्याकांड के अभियुक्त बरी21 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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