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शुक्रवार, 28 जुलाई, 2006 को 22:41 GMT तक के समाचार
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राजघराने के पोते ने जयदाद में हिस्सा माँगा

देवराज और उनकी बहन लालित्या
देवराज ने आरोप लगाया है कि जगत सिंह की फर्ज़ी वसीयत प्रस्तुत की गई है
भारत के प्रतिष्ठित पूर्व राजघरानों में से एक - जयपुर के पूर्व राज परिवार में संपत्ति को लेकर कलह अब जग ज़ाहिर हो गई है. पूर्व राजमाता गायत्री देवी के पोते देवराज सिंह ने जायदाद में हिस्सा माँगा है.

देवराज सिंह पूर्व राजमाता गायत्री देवी के एक मात्र पुत्र स्वर्गीय जगत सिंह की संतान हैं. देवराज की माँ और थाई राजवंश की प्रियवंदना रंगसित भी अपने बेटे को विरासत का हक़ दिलवाने जयपुर आई हैं.

प्रियवंदना और देवराज ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने जगत सिंह की फर्ज़ी वसीयत प्रस्तुत कर उन्हें संपत्ति के अधिकार से वंचित करने का षड्यंत्र रचा.

देवराज और उनकी बहन लालित्या ने जयपुर में मीडिया से कहा,"हमें पिता की विरासत में हिस्सा चाहिए." जगत सिंह ने थाइलैंड की राजकुमारी प्रियवंदना से विवाह किया था. देवराज और लालित्या उन्हीं की संतान हैं.

जगत और प्रियवंदना के दांपत्य जीवन का प्रारंभिक समय तो ठीक निकला. लेकिन 1987 में दोनों में तलाक हो गया और प्रियवंदना अपने दोनों बच्चों के साथ बैंकॉक चली गईं. अब यह परिवार भारत में है और जयपुर की भव्य पाँच सितारा होटल जयमहल पैलेस में अपना हिस्सा चाहता है. जगत सिंह जयमहल पैलेस के मालिक थे.

पूर्व राजमाता गायत्री देवी इस समय विदेश में हैं और इस बारे में उनके विचारों का पता नहीं चल सका है. अपने पिता की तरह ही ख़ूबसूरत और आकर्षक, 25 वर्षीय देवराज ने ब्रिटेन से प्रबंधन में शिक्षा ग्रहण की है जबकि उनकी बहन लालित्या ने बैंकॉक से राजनीतिशास्त्र में एमए किया है.

देवराज कहते हैं कि उन्हें तब झटका लगा जब पिता की मौत के नौ साल बाद एकाएक एक वसीयत पेश कर उन्हें संपत्ति से वंचित कर दिया गया. 23 जून 1996 की तिथि वाली इस वसीयत में जगत सिंह ने अपनी ही संतान को संपत्ति से वंचित करने की बात कही है. लेकिन देवराज इस वसीयत की सच्चाई को चुनौती देते हैं.

सवाई मानसिंह द्वितीय जयपुर के अंतिम राजा थे. बाद में सभी राजवंशों का राजस्थान में विलय हो गया था. मानसिंह ने तीन शादियाँ की थी. पहली रानी मरूधर कंवर से ब्रिगेडियर भवानी सिंह पुत्र हैं, तो दूसरी रानी किशोर कंवर से पृथ्वीराज और जयसिंह दो पुत्र हैं. मानसिंह ने तीसरी शादी गायत्री देवी से किया था और जगत सिंह उन्हीं की संतान थे.

देवराज की अपनी दादी गायत्री देवी से अच्छे रिश्ते थे. लेकिन अब देवराज कहते हैं कि प्रयासों के बाद भी बात नहीं हो पा रही है. तीन साल पहले देवराज अपनी बहन लालित्या के साथ जयपुर आए थे. तब उन्हें सिटी पैलेस का आतिथ्य मिला जहां भवानी सिंह परिवार सहित रहते हैं. भवानी सिंह की भी अपने भाइयों से ख़ास नहीं बनती.

देवराज कहते हैं कि उनके पिता के सौतेले भाई ने संपत्ति पर अधिकार जमाया है. देवराज ने जय महल पैलेस को लेकर भारत के कंपनी लॉ बोर्ड में कार्रवाई की है.

भारत के पूर्व राजघरानों में धन संपत्ति को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है. जयपुर राजघराने की संपत्ति एक हज़ार करोड़ रुपए से ज़्यादा की आंकी जाती है.

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