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पेटूराम के संन्यास से रेस्तरां मालिक खुश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केरल के त्रिशूर ज़िले में रेस्तरां मालिकों ने राहत की सांस ली है क्योंकि अपनी भयंकर खुराक के लिए मशहूर राप्पई अपने काम से संन्यास ले रहे हैं. राप्पई के संन्यास से रेस्तरां मालिक एक बार फिर ' पेट भर खाओ' की स्कीम ला सकते हैं. ऐसा इसलिए हो सका है क्योंकि ज़बर्दस्त भोजन करने वाले राप्पई को डॉक्टरों ने कम खाना खाने की सलाह दी है. राप्पई के भोजन की मात्रा को ज़बर्दस्त कहना भी कम है क्योंकि एक जमाने में वो तीन बाल्टी चावल और उसके साथ मांस मछली सबकुछ आसानी से खाते थे. नाश्ते में 70-80 इडलियां खाना राप्पई के लिए आम बात है. कहा जाता है कि एक बार राप्पई एक रेस्तरां में गए जहां एक कूपन कटाकर भरपेट खाने का प्रावधान था. जब राप्पई तीन बाल्टी चावल, एक बाल्टी मछली और दस किलो मांस खा गए तो बात बिगड़ गई. रेस्तरां मालिक हो गए नाराज़ और उन्होंने पुलिस बुला ली. त्रिवेंद्रम में बीबीसी संवाददाता श्रीदेवी पिल्लै के अनुसार राप्पई के भोजन की आदतें पूरे राज्य में मशहूर हैं. राप्पई एक दिन में 700 इडली और दस किलो हलवा खाने का कारनाम भी कर चुके हैं. हालांकि अब उनके ख़राब होते स्वास्थ्य को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें भोजन कम करने की सलाह दी है. राप्पई की उम्र अब 64 वर्ष है और उनके पेट में दर्द रहता है. वो कहते हैं " मुझे डायबिटीज़ है और मेरा वज़न 115 किलो है. मैं अब डॉक्टरों की बात सुनूंगा.मुझसे सबने कहा है कि खान पान का ध्यान रखो." राप्पई ने फ़ैसला किया है कि वो अब सामान्य लोगों की भोजन करेंगे. हंसते हुए अपने पोपले मुंह को खोलते हुए राप्पई बताते हैं कि बहुत अधिक मिठाईयां खाने के कारण उनके सारे दांत टूट गए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें केला ग़ायब होने का डर17 जनवरी, 2003 | विज्ञान शाकाहार रोके दिल का दौरा16 दिसंबरजनवरी, 2002 | पहला पन्ना फ़ास्ट फ़ूड यानी रोगों को बुलावा05 अगस्त, 2002 | पहला पन्ना क्रिसमस का हज़ारों टन कूड़ा!27 दिसंबर, 2004 | पहला पन्ना ख़ानसामाओं को शाही गुर08 मई, 2003 | भारत और पड़ोस पढ़ाई के साथ भोजन | भारत और पड़ोस रंग और ढंग बदलता डोसा16 नवंबर, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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