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ब्लॉग साइट पर 'रोक', युवाओं में गुस्सा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में चुनिंदा ब्लॉग वेबसाइटों के अचनाक इंटरनेट पर नज़र न आने से युवा वर्ग में नाराज़गी है. भारत में इंटरनेट सेवा देने वाली (आईएसपी) 153 कंपनियों ने पिछले एक हफ़्ते से 17 वेबसाइटों को दिखाना बंद कर दिया है. जहाँ युवा सरकार को दोषी ठहराते हैं वहीं सरकार की तरफ़ से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. ऐसे वेबसाइट जिनके जरिए किसी ख़ास समूह में शामिल लोग अपनी पहचान सार्वजनिक किए जाने की बाध्यता के बिना किसी भी विषय पर बेबाक टिप्पणियों का आदान-प्रदान करते हैं, उन्हें ब्लॉग साइट कहा जाता है. यह ज़रूरी नहीं है कि इन वेबसाइटों पर एक निश्चित समूह के लोग ही विचारों का आदान प्रदान करें. बाहरी लोगों को भी इसमें शामिल होने की इजाज़त होती है. अभी भारत में जो ब्लॉग वेबसाइट भारत में इंटरनेट पर नहीं दिख रहीं, उनमें कई गूगल के ब्लॉगस्पॉट से संबंधित हैं. ब्लॉगिंग के ज़रिए अपने दफ़्तर या समाज के बारे में बेबाक राय रखने वालों का कहना है कि इन पर रोक लगाने का मतलब है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चोट करना. ऐसे कई इंटरनेट चहेतों ने सूचना के अधिकार के कानून के तहत अर्ज़ी दी है ताकि ये पता चल सके कि किन कारणों से और किसके आदेश पर ब्लॉग वेबसाइटों को बाधित किया गया है. गुस्सा लोगों का कहना है कि मुंबई धमाकों में मारे गए लोगों के परिजनों को मदद पहुँचाने के लिए बनाई गई ब्लॉगसाइट को भी अब देखा नहीं जा सकता. केंद्र सरकार ने अपनी ताज़ा अधिसूचना में यह नहीं बताया है कि इन वेबसाइटों को क्यों बंद किया गया. इससे युवाओं की नाराज़गी और बढ़ी है. ब्लॉग साइटों पर लिखने वाली दीना मेहता कहती हैं, "हम जवाब चाहते हैं. क्या सेंसरशिप थोपी जा रही है. मैं तो यही सोचती थी कि भारत में तमाम समस्यायों के बावजूद कम से कम अभिव्यक्ति की आज़ादी तो है." ऐसे ही एक और ब्लॉगर अमित अग्रवाल कहते हैं, "मेरे देश की सरकार इंटरनेट पर नियंत्रण करने वाले चीन, सऊदी अरब, पाकिस्तान और इथियोपिया जैसे देशों की कतार में आ गई है." उनका कहना है कि अगले एक दो दिनों में अगर प्रतिबंध नहीं हटा तो यह मुद्दा रंग पकड़ सकता है. तकनीकी सलाहकार अभिषेक बक्शी ने सूचना पाने के अधिकार का प्रयोग करते हुए दो अर्जियाँ दाखिल कर सरकार से पूछा है कि आख़िर ऐसा क्यों किया गया. केंद्र सरकार ने जुलाई 2003 में अधिसूचना जारी की थी जिसमें कहा गया है कि भारत की संप्रभुता और अखंडता, राष्ट्रीय सुरक्षा, अन्य देशों से दोस्ताना रिश्ते और कानून तोड़ने के लिए प्रोत्साहित करने वाले वेबसाइटों को सरकार प्रतिबंधित कर सकती है. | इससे जुड़ी ख़बरें गूगल ने ऑनलाइन लाइब्रेरी का काम रोका13 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना गूगल के चित्रों से इसरो को चिंता08 जुलाई, 2006 | विज्ञान इस्लामी वेबसाइटों पर साप्ताहिक बुलेटिन02 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना चाभी वाला लैपटॉप सिर्फ़ 100 डॉलर में29 सितंबर, 2005 | विज्ञान चुपके-चुपके फैलता जासूसी का कारोबार07 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस ईबे इंटरनेट कंपनी स्काइप को ख़रीदेगी12 सितंबर, 2005 | कारोबार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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