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गुरुवार, 22 जून, 2006 को 12:18 GMT तक के समाचार
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'माओवादियों को मनाने में भारत का हाथ'
प्रचंड
किसी लोकतंत्र में माओ-त्से-तुंग की दिखाई व्यवस्था से आधुनिक ज़रूरतें पूरी नहीं हो सकती
नेपाल में माओवादी विद्रोहियों के नेता प्रचंड के अनुसार भारत ने नेपाली माओवादियों और सात राजनीतिक दलों को क़रीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

पिछले साल नवंबर में दिल्ली में माओवादियों और मुख्यधारा में शामिल राजनीतिक दलों की बातचीत में भारत ने कोई औपचारिक भूमिका नहीं निभाई थी.

लेकिन प्रचंड का कहना है कि भारत लंबे समय से माओवादियों और राजनीतिक दलों से अनुरोध करता आया था कि वे संयुक्त तौर पर काम करें.

एक पत्रिका को दिए इंटरव्यू में उन्होंने ये भी कहा कि उनका संसदीय लोकतंत्र में विश्वास नहीं है.

उनका कहना था कि यदि लोगों का मत हो तो चाहे राजशाही नेपाल में बनी रह सकती है लेकिन उनकी अपनी राय ये थी कि राजशाही ख़त्म कर, सरकारी और माओवादी सेनाओं में कमी लाकर संसाधन विकास के कामों में लगाने चाहिए.

उनका ये भी कहना था कि किसी लोकतंत्र में माओ-त्से-तुंग की दिखाई व्यवस्था से आधुनिक ज़रूरतें पूरी नहीं हो सकती.

उन्होंने समाज में प्रतिस्पर्धा की इजाज़त न देने के लिए स्टालिन की भी आलोचना की.

उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि पूँजीपतियों के लाभ अर्जित करने से विकास को मदद मिलती है.

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