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पाकिस्तान-चीन के बीच बस सेवा शुरु | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान और चीन के बीच 13 साल पुराने समझौते के तहत गुरुवार से औपचारिक तौर पर बस सेवा शुरु हो गई. पाकिस्तान के संचार मंत्री शमीम अहमद ने गिलगित शहर से हरी झंडी दिखा कर बस को रवाना किया. यह बस पश्चिमी चीन के शहर काशगर तक जाएगी. पाकिस्तानी अधिकारियों ने बताया कि इसी समय काशगर से भी एक बस गिलगित के लिए रवाना हुई. पहली बस में कुल 16 यात्री सवार थे. इसके साथ-साथ पाकिस्तानी अधिकारियों को लेकर एक और बस रवाना हुई. गिलगित से काशगर का रास्ता पुराने ज़माने में दोनों क्षेत्रों के बीच संपर्क का ज़रिया था और बस सेवा शुरु होने से यह रास्ता फ़िर खुल गया है. दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत उत्तरी पाकिस्तान के लोगों को बस से चीन जाने के लिए वीज़ा बनाने की ज़रूरत नहीं होगी. वे सिर्फ़ सीमा पास हासिल कर यात्रा कर सकते हैं जिसकी प्रक्रिया क़ाफ़ी उदार बनाई गई है. इसी तरह गिलगित आने के इच्छुक चीन के व्यवसायियों और पर्यटकों को सीमा पर ही मौज़ूद पाकिस्तानी अधिकारी पास बना कर देंगे. हालाँकि यह गिलगित तक की यात्रा के लिए ही मान्य होगा. अधिकारियों के मुताबिक गिलगित से काशगर के बीच 550 किलोमीटर की दूरी तय करने में बस को लगभग 16 घंटे का समय लगेगा. स्थानीय लोग इस बस सेवा से क़ाफ़ी उत्साहित हैं और उनका कहना है कि देश के अन्य क्षेत्रों से भी सीमा पर जाने की प्रक्रिया उदार बना दी जाए तो काराकोरम राजमार्ग खुद ही पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा केंद्र बन सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें सोने की पालकी ननकाना साहिब पहुँची30 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस आख़िरकार घर वापसी संभव हुई17 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस नौ और लोगों ने एलओसी पार की21 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस मुशर्रफ़ ने चीन में कश्मीर मुद्दा उठाया03 नवंबर, 2003 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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