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अब नेत्रहीन भी कर सकेंगे चेक का प्रयोग | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में एक नेत्रहीन व्यक्ति ने एक नए तरह का अधिकार हासिल किया है चेकबुक का इस्तेमाल करने का. अब से पहले तक बैंक नेत्रहीनों को चेकबुक नहीं दिया करता था लेकिन प्रसन्न कुमार पिंचा ने अदालत की मदद से यह अधिकार हासिल कर लिया है. विश्लेषकों का कहना है कि अगर इस फ़ैसले पर बैंक न्यायालय में अपील नहीं करते हैं तो यह भारत की लगभग एक करोड़ नेत्रहीन आबादी के लिए एक नया अधिकार बन जाएगा. प्रसन्न नेत्रहीन हैं और भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम की राजधानी गुवाहाटी में इंडस्ट्रियल डेवलेपमेंट बैंक ऑफ़ इंडिया (आईडीबीआई बैंक) में अपना खाता खोलना चाहते थे. वो जब खाता खोलने के लिए इस बैंक की एक शाखा में पहुँचे तो पहले तो उनसे कहा गया कि नेत्रहीन होने के कारण वो अपना खाता नहीं खोल सकते. इस पर उन्होंने सवाल उठाया कि क्या नेत्रहीन होने से भारत में उनकी नागरिकता भी कम हो जाती है जिसके बाद खाता तो खुला पर चेक बुक के इस्तेमाल की अनुमति नहीं मिली. बैंक का कहना था कि अगर उन्हें चेक बुक का इस्तेमाल करने की इजाज़त मिलती है तो इसमें धोखाधड़ी होने की भी आशंका है. भेदभाव क्यों? इस पर प्रसन्न ने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया और दलील दी कि हस्ताक्षरों में किसी तरह की धोखाधड़ी के लिए उन्हें ज़िम्मेदार करार देने की बात भेदभावपूर्ण है और उनकी इस दलील से न्यायालय सहमत है. प्रसन्न ने बीबीसी को बताया, "हो सकता है कि मेरा हस्ताक्षर देखने में अच्छा न लगे पर उसकी कोई नकल नहीं कर सकता." उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि दुरुपयोग की स्थिति का नेत्रहीन होने से कुछ लेना-देना नहीं है और ज़रूरी नहीं है कि ऐसा उसी के साथ हो जो नेत्रहीन हैं. न्यायालय के इस आदेश पर बैंक के अधिकारियों की ओर से इस बाबत कोई जानकारी नहीं दी गई है कि वो इस फ़ैसले को चुनौती देंगे या नहीं. उधर प्रसन्न अब बीमा कंपनियों से भी टकराने का मन बना चुके हैं क्योंकि बीमा कंपनियों में नेत्रहीनों के लिए अधिक प्रीमियम भरने का नियम हैं. इसके पीछे तर्क है कि नेत्रहीन लोगों का जान-माल की क्षति का ज़्यादा ख़तरा रहता है. | इससे जुड़ी ख़बरें बीबीसी समाचार यानी पत्थर की तेज़ धार16 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस नेत्रहीनों के लिए ऑडियो लाइब्रेरी22 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस कितना ख़ुशहाल है बेतिया29 फ़रवरी, 2004 | भारत और पड़ोस नेत्रहीनों के लिए साइबर कैफ़े | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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