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सुप्रीम कोर्ट में जया की याचिका ख़ारिज | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अभिनेत्री और राज्यसभा की सदस्य रही जया बच्चन की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है. उन्होंने राष्ट्रपति के उस फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसके तहत उन्हें राज्यसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था. राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने यह फ़ैसला चुनाव आयोग की सिफ़ारिश पर विचार करने के बाद किया था. चुनाव आयोग का कहना था कि जया बच्चन राज्यसभा सांसद होते हुए भी उत्तर प्रदेश फ़िल्म विकास निगम की चेयरमैन रही हैं जो लाभ का पद है. इसलिए उनकी राज्य सभा सदस्यता समाप्त कर दी जानी चाहिए. आयोग ने इस संबंध में जया बच्चन को नोटिस जारी किया था जिसके बाद जया बच्चन ने सुप्रीम कोर्ट का सहारा लिया था. इस बारे में जया बच्चन कहती रही हैं कि चेयरमैन के पद पर रहते हुए उन्होंने वेतन नहीं लिया है इसलिए वो लाभ का पद नहीं है. चुनाव आयोग को कांग्रेस के एक नेता मदनमोहन शुक्ला की ओर से एक शिकायत मिली थी जिसमें उन्होंने आयोग से जया बच्चन के लाभ के पद पर होने के कारण अयोग्य घोषित करने का अनुरोध किया था. | इससे जुड़ी ख़बरें सोनिया गांधी का लोकसभा से इस्तीफ़ा 23 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस सीपीएम क़ानून बनाने के पक्ष में23 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 'लाभ के पद' को लेकर संसद में हंगामा22 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस जया बच्चन राज्यसभा के अयोग्य क़रार17 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस जया बच्चन की सदस्यता संकट में07 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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