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वर्ष 2020 तक भारत महाशक्ति बन जाएगा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
समय और समाज के बदलते स्वरूप में जितनी तेज़ गति से तकनीक ने प्रवेश किया है, निश्चय ही हम आने वाले समय में एक ऐसी दुनिया के निवासी होंगे जिसके भीतर सूचना और संचार का नया समाज आकार लेगा. भारतीय समाज का कोई भी स्वरूप हो, चाहे वह सामाजिक संदर्भों से शुरू होकर राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोणों से संबंध स्थापित करता हो, सभी ओर परिवर्तनशीलता नज़र आती है. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कभी 21वीं सदी के इस भारत के वर्तमान पर सटीक टिप्पणी की थी जिसमें भारत को न केवल तकनीकी रूप से बल्कि आर्थिक रूप से भी विश्व की महाशक्ति घोषित किया था और इसे नकारा नहीं जा सकता. ख़ासकर अब समूचे विश्व में एक ऐसी आर्थिक संस्कृति का निर्माण हो रहा है, जो विश्व को एक बाज़ार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. ऐसे में किसी भी राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में आर्थिक नीतियों का जो योगदान होता है, उससे कहीं अधिक उस राष्ट्र के राजनीतिक दृष्टिकोण का होता है. पिछले कुछ समय में भारतीय उपमहाद्वीप में जो परिवर्तन आर्थिक तौर पर नज़र आए हैं, वे आने वाले निकट भविष्य में हमें हमारे देश के प्रति एक आशावादी दृष्टिकोण से सोचने पर मजूबर करते हैं. दुनियाभर में डंका लगातार बढ़ती एक ऐसी अर्थव्यवस्था, जिसमें आर्थिक वृद्धि की दर साढ़े सात फ़ीसदी से ऊपर की ओर भाग रही है, सेंसेक्स दस हज़ारी आंकड़े से ऊपर उछाले मार रहा है और सुदूर कोने में बैठा एक भारतीय एक ओर तो दुनिया के अरबपतियों में शामिल है. वह ब्रिटेन की सबसे बड़ी स्टील कंपनी, आर्सेलर को 23.5 अरब डॉलर में ख़रीदने की कुव्वत दिखा, वहां की संसद में खलबली मचा देता है. जो कुछ है वह सब कुछ भारतीय है, जो भी है वह भारतीय होना चाहता है. फिलहाल चल रहा है वर्ष 2006 और समय का एक लंबा पड़ाव हमें पार करना है, अभी तो केवल आर्थिक संदर्भों में हमने पुष्टता पाई है, वर्ष 2020 तक तो शायद हम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के महत्वपूर्ण स्थायी सदस्यों में से एक होंगे. जॉर्ज डब्ल्यू बुश भारत आने से पहले एशियन सोसायटी न्यूयॉर्क में एक बैठक को आयोजित करते हुए कहते हैं, "हमारी सही समझ इस बात में है कि हम एक ऐसे लोकतंत्र से संबंध स्थापित करें, जहां हमारी 95 प्रतिशत असली दुनिया बैठी है, मुझे खुशी है कि हम भारत जैसी संपन्न और समृद्ध महाशक्ति से परमाणु समझौते और संबंधों को स्थापित कर रहे हैं." निश्चय ही हमारी संपूर्ण शक्ति का सही प्रदर्शन आने वाले समय में होगा, जिसकी समय सीमा शायद वर्ष 2020 ही हो. कितनी गौरव की बात है कि परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किए बिना ही अमेरिका का हमें परमाणु क्षेत्र में सहयोग और यूरेनियम संवर्धन के क्षेत्र में व्यापक समर्थन मिल रहा है, जिसकी गूंज समूचे विश्व में गूंज रही है. | इससे जुड़ी ख़बरें आईआईएमसी में वेब पत्रकारिता कार्यशाला10 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस अपेक्षा से अधिक अच्छा रहा यह अनुभव10 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस जामिया में ऑनलाइन पत्रकारिता कार्यशाला09 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस भोपाल में हुई पत्रकारिता कार्यशाला 08 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस बीबीसी की पत्रकारिता कार्यशाला इंदौर में06 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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