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मंगलवार, 28 मार्च, 2006 को 22:00 GMT तक के समाचार
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पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल का निधन
बंसीलाल ग्यारह वर्षों तक हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल का दिल्ली में निधन हो गया है. केंद्र सरकार में रक्षा और रेल मंत्री के पदों पर भी रह चुके बंसीलाल 79 वर्ष के थे.

उनके शव को हरियाणा में उनके गृह नगर भिवाणी ले जाया गया है और उनका अंतिम संस्कार उनके गाँव गोलागढ़ में होगा.

बंसीलाल अलग-अलग समय पर लगभग ग्यारह साल हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे.

वे हरियाणा के बहुचर्चित नेताओं में से एक थे. हरियाणा मामलों के कुछ जानकर राज्य में उनके शासनकाल के दौरान हुए विकास कार्यों, विशेष तौर पर गाँव-गाँव में बिजली पहुँचाने और सड़क निर्माण के लिए उन्हें 'विकास पुरुष' के रूप में देखते हैं.

लेकिन कुछ अन्य जानकार उन पर लोकतांत्रित परंपराओं को दरकिनार कर मनमानी से प्रशासन करने का आरोप लगाते हैं.

बंसीलाल पहली बार मई 1968 में मुख्यमंत्री बने थे जब हरियाणा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भगवत दयाल शर्मा ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाए जाने की सिफ़ारिश की थी.

इसके बाद वे केंद्र में इंदिरा गांधी सरकार के समय, उनके पुत्र संजय गांधी के करीबी लोगों में गिने जाने लगे और 1968 से 1975 तक मुख्यमंत्री रहे.

वर्ष 1975 में इंदिरा गांधी सरकार में, आपातकाल के दौरान वे रक्षा मंत्री बने और लगभग डेढ़ साल तक रक्षा मंत्री रहे. इस दौरान वे कई विवादों के केंद्र में रहे. आपातकाल हटाए जाने के बाद 1977 में वे चुनाव हार गए.

भजन लाल से टक्कर

वर्ष 1979 में हरियाणा की राजनीति में भजनलाल एक बड़े खिलाड़ी के रूप में सामने आए और जनता पार्टी के विधायकों को वे अपने साथ कांग्रेस में ले गए और कई वर्षों तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे.

लेकिन बंसीलाल ने भजन लाल से समझौता नहीं किया. वे वर्ष 1980, 1984 और 1989 में कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में भिवाणी से चुनाव जीतकर लोकसभा में पहुँचे. इस दौरान 1984 में वे केंद्र सरकार में रेल मंत्री और 1986 में परिवहन मंत्री रहे.

लेकिन भजन लाल की कांग्रेस आलाकमान से निकटता के कारण उनकी राजीव गांधी की सरकार में दाल नहीं गली और कांग्रेस नेतृत्व से उनकी दूरी बढ़ती ही गई.

वर्ष 1986-87 के दौरान उन्हें मुख्यमंत्री बनाकर हरियाणा दोबारा भेजा गया लेकिन उसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस चुनाव हार गई.

हरियाणा विकास पार्टी

वर्ष 1991 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण जब बंसीलाल को कांग्रेस से निकाला गया था तो उन्होंने हरियाणा विकास पार्टी का गठन किया और 1996 में फिर तीन साल के लिए राज्य के मुख्यमंत्री बने.

लेकिन वर्ष 1999 में उनके साथ गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी ने उनका साथ छोड़ दिया. इसके बाद कांग्रेस ने हरियाणा विकास पार्टी का थोड़े समय के लिए साथ दिया लेकिन पार्टी में मतभेदों के कारण सरकार गिर गई.

इसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में उनकी पार्टी हार गई और वर्ष 2004 में उन्होंने हरियाणा विकास पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया.

जब वर्ष 2005 में हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बनी तो बंसीलाल के बेटे सुरेंद्र सिंह उसमें मंत्री बने. लेकिन मार्च 2005 में एक विमान दुर्घटना में सुरेंद्र सिंह की मृत्यु के बाद बंसीलाल टूट से गए थे और बीमार रहने लगे थे.

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