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सोमवार, 27 फ़रवरी, 2006 को 10:48 GMT तक के समाचार
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जेसिका हत्याकांड की दोबारा जाँच संभव
शिवराज पाटिल
शिवराज पाटिल ने दोबारा जाँच के संकेत दिए हैं
भारत के गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने सोमवार को संकेत दिए हैं कि जेसिका मामले की जाँच दोबारा करने के आदेश दिए जा सकते हैं.

गृह मंत्री पाटिल ने लोकसभा में कहा, "हालाँकि कानूनी तौर पर किसी मामले की दोबारा सुनवाई नहीं हो सकती है पर कुछ मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करने के निर्देश दिए हैं जिन्हें हम एक कानून के तौर पर देख सकते हैं."

संसद के दोनों ही सदनों में कई सांसदों ने जेसिका मामले की जाँच फिर से कराने की माँग रखी.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद, गुरूदास दासगुप्ता ने कहा, "हम माँग करते हैं कि भारत सरकार और गृह विभाग को इस मामले को न्यायालय में फिर से ले जाना चाहिए और इस पूरे मामले की जाँच सीबीआई से करानी चाहिए."

इसका जवाब देते हुए पाटिल ने कहा, "इस वक़्त तो हाईकोर्ट ने ख़ुद इस मामले को अपने संज्ञान में ले लिया है और इस बात की पड़ताल करने को कहा है कि मामले की जाँच में कहाँ कमी रह गई. ऐसे में जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों या हाईकोर्ट के फ़ैसले के मुताबिक होगा, उसे हम मानने को तैयार हैं."

ताज़ा घटनाक्रम

ग़ौरतलब है कि इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बहुचर्चित जेसिका लाल हत्याकांड मामले में 24 फ़रवरी को दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर पूछा है कि इस मामले की जाँच में क्या ख़ामियाँ थीं.

इस नोटिस के जारी होने के बाद त्वरित कार्यवाही करते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त केके पॉल ने जेसिका लाल मामले की जाँच करने वाले अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय पड़ताल के आदेश दे दिए हैं.

इसके अलावा मामले की जाँच से जुड़े एक अधिकारी, सुरेंद्र शर्मा को हौज ख़ास थाने के थाना प्रभारी के पद से हटाकर सुरक्षा सेल में भेज दिया गया है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जारी इस नोटिस का जवाब 19 अप्रैल तक देने के लिए कहा गया है.

 कानूनी तौर पर किसी मामले की दोबारा सुनवाई नहीं हो सकती है पर कुछ मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करने के निर्देश दिए हैं जिन्हें हम एक कानून के तौर पर देख सकते हैं
शिवराज पाटिल, गृह मंत्री

ग़ौरतलब है कि मशहूर मॉडल जेसिका लाल की हत्या के मामले पर चली सात वर्ष लंबी सुनवाई के बाद 21 फ़रवरी को सभी नौ अभियुक्त बरी कर दिए गए थे.

इस फ़ैसले के बाद समाज के तमाम वर्गों और मीडिया में इस मसले पर ग़रमाग़रम बहस छिड़ी हुई है.

इसी दिशा में ख़ुद संज्ञान में लेते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने यह नोटिस जारी किया था.

दिल्ली में एक सत्र अदालत में जेसिका लाल की हत्या के मामले की सुनवाई हो रही थी जहाँ अतिरिक्त सेशन जज एसएल भयाना ने इस मामले पर अपना फैसला सुनाते हुए अभियुक्तों को बरी कर दिया था.

बताया जा रहा है कि सबूतों के अभाव में और गवाहों के बदल जाने के कारण ऐसा हुआ.

जेसिका लाल की हत्या के मामले में पूर्व कैबिनेट मंत्री विनोद शर्मा के बेटे मनु शर्मा सहित नौ लोगों को अभियुक्त बनाया गया था.

आरोप

जेसिका लाल की जुलाई 1999 में दिल्ली के एक रेस्तराँ में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

जेसिका लाल
सात वर्ष तक चला मुक़दमा

आरोप था कि मनु शर्मा ने जेसिका लाल की गोली मारकर हत्या कर दी थी जबकि उनके अन्य दोस्तों ने सबूत मिटाने की कोशिश की थी.

आरोप में कहा गया था कि मनु शर्मा ने जेसिका लाल की इसलिए हत्या कर दी थी क्योंकि जेसिका ने मनु के कहने पर भी उसे शराब परोसने से मना कर दिया था.

मनु शर्मा के अलावा इस मामले में आठ और लोगों पर भी आरोप लगाया गया था जिनमें से एक विकास यादव बाहुबली नेता डीपी यादव के पुत्र हैं.

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