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बांग्लादेश ने टीकाकरण अभियान छेड़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बांग्लादेश के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने अब तक का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान छेड़ा है. उनकी योजना है कि अगले तीन हफ़्तों में तीन करोड़ तीस लाख बच्चों को खसरे का टीका लगाए जाने की है. इसके लिए हज़ारों टीकाकरण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं. साथ ही स्वास्थ्य कार्यकर्ता छोटे शहरों, यातायात केंद्रों और फैक्ट्रियों में जाएँगे जहाँ स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध नहीं होती हैं. बांग्लादेश में पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की खसरे की वजह से बड़ी संख्या में मौत होती है. यह बच्चों की मौत के पाँच प्रमुख कारणों में से एक है. एक अनुमान के अनुसार बांग्लादेश में हर साल 20 हज़ार बच्चों की मौत खसरे से होती है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया के साठ लाख से भी अधिक पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चे हर साल बेवजह मर जाते हैं. वे ऐसी बीमारियों से मरते हैं जिनमें से कई के बचाव के टीके उपलब्ध हैं और उनका इलाज भी हो सकता है. इन बीमारियों मे पेचिश, मलेरिया, खसरा, और निमोनिया जैसे रोग शामिल हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को स्तनपान कराना, साफ़ पानी और वातावरण की सफ़ाई का पूरा ख़याल रखना जैसी छोटी छोटी सावधानियाँ मृत्यु दर में कमी ला सकती हैं. इसके अलावा जिन बीमारियों से बचाव के टीके उपलब्ध हैं, उन्हें अधिक से अधिक बच्चों को लगा कर भी बच्चों की मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है. संयुक्त राष्ट्र ने बच्चों की मृत्यु दर को 2015 तक दो तिहाई घटाने का लक्ष्य रखा है. यूनिसेफ़ का मानना है कि ये लक्ष्य तभी पूरा हो सकता जब बच्चों के स्वास्थ्य मे सुधार के लिए बड़े पैमाने पर आवश्यक क़दम उठाए जाएँ. | इससे जुड़ी ख़बरें टीकाकरण के लिए करोड़ों डॉलर दिए25 जनवरी, 2005 | कारोबार भारत में पोलियो टीकाकरण अभियान21 नवंबर, 2004 | विज्ञान टीकाकरण का बड़ा यूरोपीय अभियान09 सितंबर, 2005 | पहला पन्ना टीकाकरण अभियान तेज़ हुआ12 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस लाखों बच्चों की बेवजह मौत27 जून, 2003 | विज्ञान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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