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बुधवार, 21 दिसंबर, 2005 को 11:00 GMT तक के समाचार
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यह इश्क़ नहीं आसाँ...
प्रेमी प्रेमिका
पुलिस की युवक युवतियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का कड़ा विरोध हुआ है
उत्तर प्रदेश के मेरठ ज़िले में कुछ प्रेमी युगल माँबाप की नज़रों से छिप कर अपने प्रेम का इज़हार करने निकले तो वे नहीं जानते थे कि कुछ पुलिसवाले ख़ुद ब ख़ुद उनके अभिभावकों की ज़िम्मेदारी संभाल लेंगे.

पुलिस ने ऐसे लोगों की धरपकड़ के लिए एक अभियान की शुरुआत की जिसे कथित रूप 'ऑपरेशन मजनू' का नाम दिया गया और निकल पड़े कुछ पुलिस कर्मी अपने प्रेमियों की तलाश में.

सुना जाता है कि इस अभियान के दौरान एक सार्वजनिक पार्क में युवक युवतियों को घेर कर पीटा भी गया.

जब कुछ टीवी चैनेलों ने यह मामला उठाया तो कई सरकारी और ग़ैर-सरकारी संगठन तुरंत हरकत में आ गए.

 हमारे अभिभावक इतने मॉर्डन ख़्यालों के नहीं है कि हमें इस तरह की इजाज़त दें क्योंकि उनको लगता है कि इससे उनकी इज्ज़त ख़राब होती है."
एक युवा

राष्ट्रीय महिला आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार से इस मामले में रिपोर्ट माँगी है.

यह मामला संसद में भी उठा और राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी की नेता सुषमा स्वराज ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताई और पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ समुचित कार्रवाई की माँग की.

मेरठ की घटना के बारे में आप क्या कहना चाहेंगे के सवाल पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का कहना था, "मेरठ में लड़के-लड़कियों के साथ जो हुआ, बहुत ग़लत हुआ. हम कड़ी से कड़ी कार्रवाई कर चुके हैं. उनके माता-पिता जो भी कहेंगे, हम करेंगे."

दिल्ली के युवाओं ने भी इस पर कड़ी आपत्ति ज़ाहिर की.

बीबीसी से बातचीत में एक लड़की ने कहा, "मुझे तो यही डर लगता है कि कहीं मेरे प्रेमी के साथ मुझे मेरे माँ-पिता देख न लें. हमें टीवी पर आने से डर नहीं लगता पर माता-पिता से डर लगता है."

यह पूछे जाने पर कि क्यों डर लगता है, एक युवा का कहना था, "हमारे अभिभावक इतने मॉर्डन ख़्यालों के नहीं है कि हमें इस तरह की इजाज़त दें क्योंकि उनको लगता है कि इससे उनकी इज्ज़त ख़राब होती है."

एक अन्य युवा, रॉकी कहते हैं, "हमें भी मेरठ की घटना के बारे में जानकर काफ़ी दुख हो रहा है. यह ग़लत है. हालांकि हमें भी पुलिस से काफ़ी डर लगता है."

 हम अगर आपस में आलिंगन या चुंबन कर रहे होते हैं तो पुलिस वाले मुझे अलग ले जाते हैं. पहले हमसे कहते हैं कि यह ग़लत है और फिर 50-60 रूपए की माँग करते हैं."
एक युवा

एक ऐसे ही युगल से बात की तो लड़के ने बताया, "हम अगर आपस में आलिंगन या चुंबन कर रहे होते हैं तो पुलिस वाले मुझे अलग ले जाते हैं. पहले हमसे कहते हैं कि यह ग़लत है और फिर 50-60 रूपए की माँग करते हैं."

इस घटना के विरोध में मेरठ शहर में कई जगह प्रदर्शन हुए और छात्रों ने पुलिस के पुतले जलाए और उनके ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की.

मामला तूल पकड़ता देख पुलिस ने युवक युवतियों की पिटाई करने के लिए दो महिला पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है.

कार्रवाई

मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजीव रंजन ने बीबीसी को बताया,'' जैसे ही हमें दो महिला पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ शिकायत मिली हमने तुरंत कार्रवाई की. साथ ही हमने इस घटना की जाँच के आदेश दे दिए हैं.''

हालांकि वो इस बात से इनकार करते हैं कि इस अभियान को 'ऑपरेशन मजनू' नाम दिया गया था. उनका कहना है कि यह मीडिया का दिया नाम है.

उनकी दलील थी कि ऐसे अभियान माता-पिता और अभिभावकों के कहने पर समय समय पर चलाए जाते हैं ताकि पार्कों और अन्य सार्वजनिक स्थलों से अश्लील हरकत करनेवालों को हटाया जा सके.

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