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चार साल बाद मना विजय दिवस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सन् 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की 34 वीं वर्षगांठ को 16 दिसंबर को भारत में विजय दिवस के रूप में मनाया गया. 16 दिसंबर को ही ढाका में लेफ्टिनेंट जनरल ए ए नियाज़ी के नेतृत्व में पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के आगे आत्मसमर्पण किया था. इस आत्मसमर्पण के बाद 'पूर्वी पाकिस्तान' का हिस्सा पाकिस्तान से आज़ाद हो गया था और अब इसे बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है. उस समय भारतीय सेना के कमांडर लेफ़्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा थे. पाकिस्तान के जनरल नियाज़ी ने भारतीय सेना के सामने हथियार डाल दिए थे. उनके साथ क़रीब 90 हज़ार पाकिस्तानी सैनिकों ने भी हथियार डाले थे. विजय दिवस का मुख्य समारोह इंडिया गेट पर हुआ जहाँ रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी ने दिल्ली में एक स्थाई युद्ध स्मारक बनवाने का वादा किया है. दिलचस्प तथ्य यह है कि ये समारोह चार साल बाद मनाया गया. भाजपा इसे 1999 के करगिल युद्ध में भारत की सफलता को कम करने के एक प्रयास के रूप में देख रही है. हालाँकि रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी ने इन आरोपों का खंडन किया है. | इससे जुड़ी ख़बरें किसने बनवाया बांग्लादेश?01 जनवरी, 2003 | पहला पन्ना 1971 की 'बिच' 2005 में 'महान नेता'01 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना 1971 युद्ध के नायक अरोड़ा का निधन03 मई, 2005 | भारत और पड़ोस जनरल नियाज़ी ने मौत के सामने हथियार डाले02 फ़रवरी, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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