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शुक्रवार, 02 दिसंबर, 2005 को 12:32 GMT तक के समाचार
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राजदूत के 'बयान' पर संसद में हंगामा
नटवर सिंह
नटवर सिंह से पहले ही विदेश मंत्रालय छिन गया है
वोल्कर समिति की रिपोर्ट पर पहले से ही आलोचना का सामना कर रही सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी को इस मामले में एक राजनयिक का बयान सामने आने के कारण और मुश्किलों से दो-चार होना पड़ रहा है.

क्रोएशिया में भारत के राजदूत अनिल मथरानी का इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू के मामले में शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों में जम कर हंगामा हुआ और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.

अनिल मथरानी ने इस पत्रिका को दिए विशेष इंटरव्यू में कहा है कि पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने 2001 के इराक़ दौरे के समय अपने बेटे जगत सिंह और उनके मित्र अंदलीब सहगल को तेल का कूपन दिलाने में मदद की थी.

मथरानी 2001 में इराक़ गई कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे. विपक्षी भारतीय जनता पार्टी सदस्यों के हंगामे के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दोनों सदनों में बयान तो दिया.

लेकिन विपक्षी सदस्य इससे संतुष्ट नहीं हुए. लोकसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने इससे नाराज़गी जताई कि एक राजदूत के बयान के बाद प्रधानमंत्री इस पर बयान दे रहे हैं जबकि उन्हें इस मामले पर पहले ही बयान दे देना चाहिए था.

मांग

उन्होंने मांग की कि जिस तरह नटवर सिंह को उनके पद से हटाया गया है उसी तरह सोनिया गाँधी को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के अध्यक्ष पद से हट जाना चाहिए. उन्होंने नटवर सिंह की गिरफ़्तारी की भी मांग की.

इस पर लोकसभा में कांग्रेस के सदस्यों ने भी शोर-शराबा किया. बाद में भाजपा सदस्यों के नारेबाज़ी के बीच सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने बयान में कहा कि प्रवर्तन निदेशालय मथरानी के आरोपों की जाँच करेगा. उन्होंने कहा कि इस मामले में जस्टिस आरएस पाठक समिति पहले ही जाँच कर रही है और उनकी सरकार इस मामले की तह तक जाएगी.

प्रधानमंत्री ने अपने बयान में कहा कि मथरानी के बयान में नटवर सिंह और अन्य लोगों का नाम आना चिंता की बात है. उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि उनकी जाँच सही दिशा में चल रही है.

नटवर सिंह और अन्य लोगों के ख़िलाफ़ लगे आरोप विदेशी अनुदान नियामक क़ानून (एफ़सीआरए) के तहत आते हैं और प्रवर्तन निदेशालय इसी क़ानून के तहत इस मामले की जाँच कर रहा है.

हंगामा

शुक्रवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों ने दोनों सदनों में जम कर हंगामा किया और प्रधानमंत्री से बयान देने की मांग की.

आडवाणी ने सोनिया गाँधी के इस्तीफ़े की मांग की

विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी की अगुआई में भाजपा सदस्यों ने लोकसभा में कांग्रेस के ख़िलाफ़ जम कर नारे लगाए.

इस कारण सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी. दो बजे जब फिर से कार्यवाही शुरू हुई तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपना बयान दिया.

लेकिन विपक्षी पार्टियों का कहना था कि वे इससे संतुष्ट नहीं हैं. लोकसभा के अलावा राज्यसभा में विपक्ष के नेता जसवंत सिंह के नेतृत्व में विपक्षी सदस्यों ने जम कर शोर मचाया.

संयुक्त राष्ट्र के इराक़ के लिए विशेष कार्यक्रम 'तेल के बदले अनाज' में भ्रष्टाचार की जाँच के लिए गठित वोल्कर समिति ने नटवर सिंह का नाम लिया था.

इसके बाद नटवर सिंह से विदेश मंत्रालय तो ले लिया गया था लेकिन अभी भी वे बिना मंत्रालय के कैबिनेट मंत्री हैं.

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