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'कनिष्क जाँच में कहाँ ग़लती हुई' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कनाडा सरकार ने 1985 में हुए एयर इंडिया के कनिष्क विमान बम काँड की जाँच की समीक्षा के आदेश दिए हैं. यानी सरकार अब इस बात की जाँच कराएगी कि उस बम कांड की जो पिछली जाँच हुई उसमें क्या कहीं लापरवाही हुई? ग़ौरतलब है कि 23 जून 1985 को हुए कनिष्क बम काँड में सभी 329 यात्रियों की जान चली गई थी. कनाडा के ओंटारियो प्रांत के पूर्व प्रधानमंत्री बॉब राए की जाँच रिपोर्ट बुधवार को जारी की गई जिसमें जाँच की समीक्षा की सिफ़ारिश की गई है. कनाडा के ही नागरिक रिपुदमन सिंह मलिक और अजायब सिंह बागड़ी को काफ़ी लंबे जले मुक़दमे के बाद मार्च 2005 में बरी कर दिया गया था. इन लोगों को बरी किए जाने से कनिष्क विमान बम काँड से प्रभावित परिवारों में भारी नाराज़गी देखी गई थी. उन परिवारों ने माँग की थी कि यह जाँच कराई जाए कि इतने लंबे और महंगे मुक़दमे से आख़िर क्या हासिल हुआ और उनके लिए तो इसका फ़ैसला बहुत ही निराशाजनक रहा. एक जज ने फ़ैसला सुनाया था कि इस मामले में जो गवाह पेश किए गए वे विश्वसनीय नहीं थे और उन सबूतों से एक निश्चित संदेह से आगे किसी का दोष साबित नहीं होता. इन्हीं हालात में सरकार ने बॉब राए को अप्रैल 2005 में यह पता लगाने की ज़िम्मेदारी सौंपी थी कि क्या कहीं जाँच में लापरवाही हुई. 'साफ़ ज़रूरत' बॉब राए ने बुधवार को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा, "मेरा निष्कर्ष ये है कि एक और जाँच की ज़रूरत है."
"नई जाँच का उद्देश्य कुछ नए सबक लेना होगा, मसलन- ग़लती कहाँ हुई, क्या वे आज भी ग़लत हैं, और उन्हें कैसे सही किया जा सकता है." बॉब राए ने कहा कि कनिष्क बम काँड से पहले और बाद की घटनाओं में कनाडा की ख़ुफ़िया सेवाओं और पुलिस के क़दमों की जाँच की साफ़ ज़रूरत है. हालाँकि बॉब राए ने सरकारी कार्रवाइयों की पूर्ण न्यायिक समीक्षा का आहवान नहीं किया. बॉब राए ने कहा, "वह घटना एक जनसंहार थी. यह एक ऐसा बम हमला था जो कनाडा के नागरिकों पर किया गया और उसके परिणाम को कनाडा के लोगों को समझ में आना चाहिए." वेंकुवर में बीबीसी संवाददाता इयन गुन्न का कहना है कि उस काँड से प्रभावित परिवारों ने इन सिफ़ारिशों पर आमतौर पर संतोष जताया है लेकिन कुछ का कहना था कि ख़ुद बम विस्फोट की साज़िश की व्यापक जाँच होनी चाहिए थी. 'बदले का हमला' पुलिस ने इस मामले में जो भी कार्रवाई की, उसकी जाँच के लिए जो आम मांग उठी थी उसके समर्थन में कनाडा की संसद में प्रस्ताव पारित किया गया था.
अभियोजन पक्ष का कहना है कि मुक़दमे की कार्रवाई कनाडा की ख़ुफ़िया सेवाओं के इस फ़ैसले से प्रभावित हुई थी जिसमें उन्होंने संदिग्ध अभियुक्तों के रिकॉर्ड किए गए सबूत नष्ट करने का फ़ैसला किया था. पुलिस की जाँच में कहा गया था कि वेंकुवर में दो विमानों में बम रखे गए थे. उनमें से एक बम उस समय फट गया जब जापान में एयर इंडिया के विमान में स्थानांतरित किया जा रहा था. दूसरा बम एयर इंडिया की उड़ान संख्या 182 (कनिष्क) में उस समय फटा जब विमान आयरलैंड के ऊपर से गुज़र रहा था. वह विमान बम काँड आतंकवादी हमलों के इतिहास में सबसे बड़ा था और बाद में 11 सितंबर 2001 को न्यूयॉर्क और वाशिंगटन में हुए हमले उनसे ज़्यादा विध्वंसकारी थी. पुलिस का मानना था कि कनिष्क विमान में बम विस्फोट भारत सरकार के उस फ़ैसले का बदला लेने के लिए किया गया जिसमें भारतीय सेना ने 1984 में अमृतसर में सिखों के पवित्र स्वर्ण मंदिर में कार्रवाई की थी. इस कार्रवाई पर सिखों में भारी नाराज़गी थी. | इससे जुड़ी ख़बरें ज़ख्म नहीं भरते सालों बाद भी23 जून, 2005 | पहला पन्ना कनिष्क हादसे के 20 साल बाद...23 जून, 2005 | पहला पन्ना 'कनिष्क हादसे की दोबारा जाँच हो'13 अप्रैल, 2005 | पहला पन्ना कनिष्क कांड के दोनों अभियुक्त बरी16 मार्च, 2005 | पहला पन्ना कनिष्क हादसा मामले की सुनवाई पूरी04 दिसंबर, 2004 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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