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गुरुवार, 23 जून, 2005 को 04:03 GMT तक के समाचार
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कनिष्क हादसे के 20 साल बाद...
विमान का मलबा
कनाडा के क़ानूनी इतिहास के सबसे पेचीदा मामलों में से एक था यह मामला
एयर इंडिया कनिष्क विमान हादसे के बीस साल पूरे होने पर गुरुवार को आयरलैंड के कॉर्क नगर में शोकसभा हो रही है.

इस शोकसभा में कनाडा के प्रधानमंत्री पॉल मार्टिन और आयरलैंड की राष्ट्रपति मेरी मैकेलीस के अलावा हादसे में मारे गए लोगों के परिजन भी भाग ले रहे हैं.

23 जून 1985 को हुई इस घटना में विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई थी.

जब एयर इंडिया का विमान आयरलैंड के तट के पास, अटलांटिक महासागर के ऊपर से गुज़र रहा था तो उसमें एक भयंकर बम विस्फोट हुआ था.

आयरलैंड गईं बीबीसी संवाददाता शिवानी शर्मा के अनुसार शोकसभा सुबह शुरु होगी और मृतकों की याद में एक मिनट का मौन रखा जाएगा.

प्रार्थना सभाएँ शुरु होंगी ठीक 8 बजकर 13 मिनट पर क्योंकि 23 जून को उसी समय विमान में विस्फोट हुआ था.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार पूरे कनाडा में विभिन्न जगहों पर राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहेंगे.

'परिजन हताश'

महत्वपूर्ण है कि कुछ ही महीने पहले कनाडा की एक अदालत ने कनिष्क कांड के दोनों अभियुक्तों रिपुदमन सिंह और अजायब सिंह बागड़ी को निर्दोष क़रार दिया था.

रिपुदमन और बागड़ी
दोनों ही अभियुक्तों ने आरोपों का खंडन किया था

शिवानी शर्मा के अनुसार मृतकों को परिजन इस फ़ैसले से हताश हैं और मामले की सार्वजनिक जाँच की माँग कर रहे हैं.

उनका कहना है कि मृतकों के रिश्तेदार आरोप लगाते हैं कि पूरे मामले में भारत सरकार की ओर से उन्हें कोई मदद नहीं मिली.

हाल में कनाडा में विपक्ष की पहल पर संसद ने 1985 में हुए हादसे की 'पब्लिक इंक्वायरी' यानि दोबारा जाँच करवाए जाने की सिफ़ारिश की थी.

भारत की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री पृथ्वीराज चौहान इस शोकसभा में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे.

सबसे भीषण चरमपंथी हमला

ग्यारह सितंबर 2001 को अमरीका पर हुए हमलों से पहले तक कनिष्क विमान धमाका विमान इतिहास में सबसे भयंकर चरमपंथी हमला माना जाता था.

एयर इंडिया की उड़ान संख्या 182 कनाडा से भारत जा रही थी और वह टोरंटो से उड़ान भरकर मांट्रियाल में भी कुछ देर के लिए रुकी थी.

जिस समय उसमें बम विस्फोट हुआ, तब वह लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे से क़रीब 45 मिनट की दूरी पर था.

लेकिन कनिष्क विमान अचानक राडार से ग़ायब हो गया था और विस्फोट के बाद विमान का मलबा आयरलैंड के तटवर्ती इलाक़े में बिखर गया था.

विमान में ज़्यादातर भारतीय मूल के यात्री थे जो मुंबई या दिल्ली जा रहे थे.

इस मामले की जाँच 15 साल से अधिक समय तक चली.

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