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कनिष्क हादसा मामले की सुनवाई पूरी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एयर इंडिया के विमान में बम विस्फोट के मामले में अभियुक्त दो सिखों के मामले की सुनवाई पूरी हो गई है. कनाडा में ब्रिटिश कोलंबिया की अदालत अगले साल मार्च में फ़ैसला सुनाएगी. अदालती कार्रवाई 19 महीने पहले शुरू हुई थी. अभियुक्त रिपुदमन सिंह मलिक और अजायब सिंह बागड़ी पर जून 1985 में एयर इंडिया के विमानों में दो बम रखने का आरोप है. दोनों ने मामले में अपनी किसी भूमिका से इनकार किया है. अटलांटिक महासागर के ऊपर 'कनिष्क' नाम के एक जंबो जेट में विस्फोट हो गया था और उस पर सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई थी. दूसरे बम से तोक्यो में विमान का सामान सँभालने दो व्यक्तियों की मौत हुई थी. अप्रैल 2003 में शुरू हुआ यह मामला कनाडा के न्यायिक इतिहास में सबसे व्यापक और महँगा माना जाता है. इसमें बहस का अंतिम दौर एक महीने तक चला. अदालत ने 115 लोगों की गवाही ली. अदालती कार्रवाई पर 10 करोड़ डॉलर का ख़र्च आया. आरोप पुलिस का आरोप है कि विमानों में बम रखने के पीछे वैंकूवर में बसे सिख चरमपंथियों का हाथ था जो अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में 1984 की सैनिक कार्रवाई का बदला लेना चाहते थे.
बागड़ी पर यह भी आरोप है कि उन्होंने न्यूयॉर्क के सिखों से 50 हज़ार हिंदुओं का क़त्ल करने का आह्वान किया था. मामले में अभियोजन पक्ष की दलीलें परिस्थितिजन्य सबूतों और दो मुख्य गवाहों के बयानों पर आधारित हैं. मुख्य गवाहों ने अदालत में कहा कि अभियुक्तों ने उन्हें एक सूटकेस वैंकूवर हवाई अड्डे पर ले जाने, लेकिन विमान पर सवार नहीं होने के लिए कहा था. बागड़ी ब्रिटिश कोलंबिया की एक फ़ैक्ट्री में कर्मचारी रहे हैं, जबकि मलिक की पहचान वैंकूवर के एक धनवान व्यवसायी के रूप में रही है. |
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