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बिहार में कई दिग्गज गिरे मुँह के बल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इलेक्ट्रानिक वोटिंग तकनीक ने मतगणना की रफ़्तार को काफ़ी बढ़ा दिया है और मंगलवार की सुबह शुरू हुई मतगणना में शाम होते-होते विधानसभा की तस्वीर साफ़ हो गई है. इन चुनावों में जो परिणाम सामने आए हैं, वह काफ़ी अप्रत्याशित कहे जा सकते हैं. 17 वर्ष पुराना लालू प्रसाद का जादू इस बार उन्हें राज्य की सत्ता पर काबिज नहीं रख सका और इस बार लोगों ने नीतिश कुमार में अपना ज़्यादा विश्वास व्यक्त किया. राज्य विधानसभा की कुल 243 सीटों के लिए इस बार दो हज़ार, एक सौ पैंतीस उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे. कई बड़े नाम इस बार अपनी कुर्सी तक न बचा सके जबकि कई नए चेहरों और हारे हुए प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है. राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी जीतीं तो लेकिन काफ़ी कशमकश के बाद. शुरूआत में मिले रुझानों में वह पीछे चल रही थीं पर मतगणना ख़त्म होने पर वह चार हज़ार, पाँच सौ के मामूली अंतर से जीत गईं. वहीं भाजपा की कद्दावर नेता सुखदा पांडे चुनाव हार गई हैं. राबड़ी सरकार में मंत्री रहे राजद के दो प्रत्याशी अवध बिहारी चौधरी और इज़ाजुल हक़ भी चुनाव हार गए हैं. कुछ प्रमुख जीते और हारे प्रत्याशियों की सूची नीचे दी गई है- जीते अब्दुल बरी सिद्दीकी- राजद हारे अवध बिहारी चौधरी- राजद | इससे जुड़ी ख़बरें बिहार चुनाव के नतीजे22 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस वोट सुशासन के लिए-नीतीश22 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस जनता झाँसे में फँस गई: लालू22 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस डेढ़ दशक के लालूराज का अंत22 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'एक जाति के आधार पर नहीं होती जीत'22 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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