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कश्मीर के बच्चों की पढ़ाई केरल में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केरल के कोज़ीकोड शहर के एक स्कूल में 186 कश्मीरी लड़के पिछले कुछ महीनों से पढ़ाई कर रहे हैं. केरल के सुन्नी जमात की ओर से चल रहे इस स्कूल में ज़्यादातर बच्चे अनाथ हैं और कश्मीर के बारामुला, पुलवामा, अनंतनाग और श्रीनगर के ग़रीब परिवारों से आते हैं. कश्मीर से करीब तीन हज़ार किलोमीटर दूर केरल के इस गर्म मौसम में, लेकिन शांत वातावरण में ये बच्चे अपनी पढ़ाई कर रहे हैं. मरकज़ी अस्सक़ाफतु सुन्निया नाम का एक प्रभावी इस्लामी संस्थान मलाबार इलाके में स्कूल और अनाथालय चला रहा है. 1978 में स्थापित इस संगठन के नाम से अनाथालय दिल्ली और मुंबई में भी चलाए जा रहे हैं. कुछ महीनों पहले इस संगठन के अध्यक्ष कथनापुरम एपी अबू बक्र मुसलीयार ने अपने कश्मीर दौरे के बाद चरमपंथ से प्रभावित गरीब बच्चों को अपने यहाँ पढ़ाने की इच्छा जताई. उसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने 200 बच्चों को केरल भेजा. संस्थान के प्रवक्ता सादिक़ का कहना है कि बच्चों का चयन राज्य सरकार ने किया. दो सौ में से कुछ केरल की गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाए और कश्मीर लौट गए. 14 वर्षीय बिलाल का कहना है कि वे यहाँ आकर शांति से पढ़ाई कर पा रहे हैं. क़ुरान, अरबी और उर्दू के साथ इन लड़कों को हिंदी, अंग्रेज़ी, विज्ञान और बाक़ी सभी विषय पढ़ाए जा रहे हैं. अलग व्यवस्था इनमे से अधिकतर बच्चे केवल कश्मीरी बोलते हैं. कुछ हिंदुस्तानी समझते हैं लेकिन स्कूल पहुंचकर उनसे बात करने में थोड़ी मुश्किल ज़रूर हुई. आम तौर पर सब इस बात से ख़ुश हैं कि वे अपने भविष्य को उज्ज्वल बना सकते हैं. इन लड़कों की उम्र छह साल से सोलह साल तक है. इनकी विशेष ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए इनके लिए अलग टीचर और खाने की व्यवस्था की गई है. जम्मू कश्मीर से भी एक अध्यापक को लाया गया है. बच्चों की देख रेख कर रहे वाहिद ने कहा कि उन्हें कोई कट्टरपंथी विचारधारा नहीं सिखाई जा रही. अलग पढ़ाई कुछ बच्चों ने बताया कि केरल में धार्मिक पढ़ाई कश्मीर से अलग है. लेकिन वहिद ने कहा कि कश्मीर में हनफ़ी इस्लाम में विश्वास किया जाता है.
जबकि केरल में शाफ़ई इस्लाम प्रभावी है. ये बच्चे मार्च में अपने घर छुट्टियों के लिए लौटेंगे. इनके खान-पान और रहन-सहन का सारा खर्च संस्थान उठा रहा है. संस्थान के अनाथालयों में करीब 400 केरल के अनाथ लड़के और 200 लड़कियाँ भी रह रही हैं. यह संगठन सरकारी मदद नहीं लेता और निजी संस्थानों और देश-विदेश में रह रहे लोगों के चंदे पर निर्भर है. इस सुन्नी जमात का केरल की राजनीति में कोई दखल नहीं है. मगर एपी अबू बक्र मुसलियन के हज़ारों समर्थक हैं. उन्हें कई लोग कट्टरपंथी मानते हैं. एक उदारवादी इमाम की हत्या के मामले में इस संगठन के कुछ सदस्यों के ख़िलाफ़ अदालत में एक मामला भी चल रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें भूकंप के बाद भी कूटनीति जारी18 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस सेना ने सीमा खोलने की तैयारियाँ पूरी की06 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'चार हफ़्ते में सब कुछ नहीं सुधर सकता'06 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस खुली नियंत्रण रेखा मगर आवाजाही नहीं07 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस नियंत्रण रेखा पर हवाई फ़ायरिंग07 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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