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मुशर्रफ़ ने माना राहत पहुँचाने में देर हुई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने भूकंप के बाद राहत कार्यों में हुए देरी पर अफ़सोस ज़ाहिर किया है लेकिन साथ ही इसका स्पष्टीकरण भी दिया है. राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने माना कि कई जगह पर लोगों को राहत के लिए इंतज़ार करना पड़ा. उन्होंने विदेशी आर्थिक मदद के ख़र्च और वितरण में पारदर्शिता का भरोसा दिलाते हुए भारत समेत अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का मदद के लिए शुक्रिया किया. उनका कहना था कि भारत के प्रधानमत्री मनमोहन सिंह ने उनसे फ़ोन पर बात की और हर तरह की सहायता का आश्वासन दिया. इस संदर्भ में उन्होंने तुर्की, ब्रिटेन, सऊदी अरब, चीन, रूस, फ़्रांस, जापान और अमरीका का विशेष तौर पर ज़िक्र किया. लेकिन उनका ये भी कहना था कि इस देरी का कोई समाधान नहीं हो सकता था क्योंकि प्रभावित क्षेत्रों में सड़कें तबाह हो गई थीं. उन्होंने पाकिस्तान की जनता के हौसले की प्रशंसा की है. उनका कहना था, "कोई भी देश ऐसी त्रासदी के लिए तैयार नहीं होता और ऐसा ही पाकिस्तान के साथ हुआ. पूरी जानकारी एकत्र करने में और स्थिति का आकलन करने में आठ से बारह घंटे लगे." पारदर्शिता इस्लामाबाद से वरिष्ठ पत्रकार एहतशामुल हक़ का कहना है कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के भाषण में सबसे अहम घोषणा थी कि विदेशी आर्थिक मदद के ख़र्च और वितरण में पारदर्शिता होगी. समाचार एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान को 35 करोड़ डॉलर की आर्थिक मदद विदेशों से मिली है. उनका कहना था कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने जनता को आश्वासन दिया कि राहत पहुँचाने में देरी ज़रूर हुई. लेकिन ये भी कहा कि कितनी विदेशी आर्थिक मदद से ख़र्च कब और कहाँ हो रहा है उसका ब्योरा सरकारी माध्यमों से लगातार दिया जाएगा. |
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