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शनिवार, 17 सितंबर, 2005 को 12:27 GMT तक के समाचार
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भाजपा ने सरकार पर तीर साधा

लालकृष्ण आडवाणी
यूपीए ने न्यूनतम साझा कार्यक्रम का कोई वादा पूरा नहीं किया: भाजपा
भारतीय जनता पार्टी ने मनमोहन सिंह के नेतृत्ववाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार (यूपीए) के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने की घोषणा कर दी है.

चेन्नई में चल रही राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पहले भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में पार्टी नेताओं से सरकार के ख़िलाफ़ अभियान में जुट जाने को कहा.

इसके बाद शनिवार को पारित राजनीतिक और आर्थिक प्रस्तावों में भी यूपीए सरकार के फ़ैसलों की कड़ी आलोचना की गई है और पार्टी नेताओं से जन-अभियान चलाने को कहा गया है.

पार्टी इसके लिए बिहार विधानसभा चुनाव को उपयुक्त अवसर मान रही है.

प्रेक्षकों का मानना है कि इसके पीछे दो वजह हैं, एक तो मनमोहन सरकार के गठन के 15 महीने पूरे हो गए हैं. दूसरे पार्टी अंदरूनी झगड़ों से नेताओं और कार्यकर्ताओं को काम पर लगाना चाहती है.

यूपीए पर निशाना साधा

भाजपा में कई विरोध के स्वर भी उठे हैं
भाजपा ने जो राजनीतिक प्रस्ताव पारित किया है, वह पूरी तरह से यूपीए सरकार पर केंद्रित है. इसमें यूपीए गठबंधन, सरकार के कामकाज, प्राथमिकताओं और असफलताओं पर निशाना साधा गया है.

प्रस्ताव के बारे में भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि मनमोहन सिंह सरकार में सत्ता के कई केंद्र हैं जिसके कारण सरकार दो क़दम आगे चलती तो चार क़दम पीछे चलती है.

भाजपा का कहना है कि यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, वामपंथी दल और द़ागी मंत्रियों की पार्टियों सत्ता के केंद्र हैं और वे सरकार के फ़ैसलों को वीटो तक कर देते हैं.

भाजपा ने राजनीतिक प्रस्ताव में सरकार पर अल्पसंख्यक और वोट बैंक की राजनीति करने का भी आरोप लगाया है.

इसके उदाहरण के रूप में आंध्र प्रदेश में मुसलमानों को रोज़गार और स्थानीय प्रशासन में आरक्षण और अलीगढ़ मुस्लिम विश्नविद्यालय में मुसलमानों को 50 फ़ीसदी आरक्षण देने के फ़ैसलों को गिनाया गया है.

प्रस्ताव में कहा गया है कि इसी का परिणाम है कि इमराना और सानिया मिर्ज़ा के मामले में मौलवी फ़तवे जारी कर रहे हैं.

विरोध के स्वर

पिछले कुछ समय से भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी के ख़िलाफ़ विरोध के स्वर मुखर हुए हैं और उन पर पद छोड़ने का दबाव भी है.

राष्ट्रीय कार्यकारिणी की शुरुआत में पूर्व अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण ने कहा था कि वरिष्ठ नेताओं का सम्मान नहीं हो रहा.

ख़बरें हैं कि शनिवार को वरिष्ठ नेता प्यारेलाल खंडेलवाल ने जिन्ना मुद्दे पर स्पष्टीकरण को राजनीतिक प्रस्ताव में शामिल करने की माँग की. लेकिन पार्टी प्रवक्ता सुषमा स्वराज ने इससे इनकार किया.

हालांकि पार्टी नेता विजय कुमार मल्होत्रा ने पत्रकारों से बातचीत में स्वीकार किया था कि पार्टी में कुछ समस्याएँ हैं और पार्टी उसमें उलझी रही है और सरकार के ख़िलाफ़ कुछ कम ज़ोर लगा पाई.

उनका कहना था कि सब ठीक-ठाक करने के बाद अब भाजपा पूरी तेज़ी से सरकार के ख़िलाफ़ अभियान चलाएगी.

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