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'पार्टी में किसी तरह का भ्रम नहीं है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मदनलाल खुराना खुराना का प्रकरण तो पूरी तरह से समाप्त हो चुका है, उनका निष्कासन वापस हो चुका है. इसलिए राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में इस प्रकरण के छाए रहने की कोई संभावना नहीं है. कार्यकारणी की बैठक में राजनीतिक प्रस्ताव होगा. साथ ही संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के आने के बाद आंतरिक सुरक्षा का संकट गहराया है इसलिए आंतरिक सुरक्षा पर भी प्रस्ताव पारित होगा. साथ ही अध्यक्षीय उदबोधन होगा. आगामी चार महीने जब तक कि अगली कार्यकारणी की बैठक नहीं होती है, पार्टी के क्या-क्या कार्यक्रम होंगे, पार्टी की क्या दिशा होगी. इस पर हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष दिशा देंगे. साथ ही हमारे नेता अटल बिहारी वाजपेयी का भी मार्गदर्शन प्राप्त होगा. लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी के बीच मतभेद की चर्चा तो मैं समझता हूँ कि लगभग 30-40 वर्षों से चली आ रही है. लेकिन क्षण भर में यह कुहासा आ जाता है और क्षण भर में छट भी जाता है. अटल बिहारी वाजपेयी ने बिलकुल स्पष्ट कर दिया है कि 40-50 वर्षों तक लगातार हम लोगों ने मिलकर काम किया है और आगे भी हमलोग काम करते रहेंगे और इस प्रकार की बेबुनियाद निराधार ख़बरे जानबूझकर क्यों फ़ैलाई जाती हैं, यह हमारी समझ में नहीं आता. कहीं पर कोई मतभेद नहीं है. मैं समझता हूँ कि एक ही राजनीतिक पार्टी में लगातार 50 वर्षों का यह संबंध एक अपने में नज़ीर है. इससे तो अन्य राजनीतिक पार्टी के नेताओं को सीख लेनी चाहिए. कहीं भ्रम की स्थिति नहीं है. मैं समझता हूँ कि लालकृष्ण आडवाणी के पाकिस्तान से वापस लौटने के बाद पदाधिकारियों की एक बैठक की जिसकी अध्यक्षता स्वयं आडवाणी ने की. उसमें उन्होंने सारी स्थिति स्पष्ट कर दी थी. कहीं पर वैचारिक भ्रम नहीं रह गया है. कुछ लोगों को हुआ होगा लेकिन पार्टी में काम करने वाले लोगों के मन कभी इस प्रकार का भ्रम नहीं रहा. (आशुतोष चतुर्वेदी से बातचीत पर आधारित) |
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