|
पंजाब पुलिस के लिए नई हिदायतें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के उत्तरी राज्य पंजाब में सरकार ने पुलिस के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं जिनमें ज़्यादा उत्तरदायित्व और ज़िम्मेदारी से अपनी ड्यूटी करने पर ज़ोर दिया गया है. मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मंगलवार को राजधानी चंडीगढ़ में पत्रकारों को बताया कि नए दिशा निर्देशों से आम लोगों को पुलिस के हाथों उत्पीड़न से मदद मिलेगी. नए दिशा निर्देशों का मक़सद पुलिसकर्मियों के उस मिज़ाज में तब्दीली लाना है जो 1980 और 1990 के दशकों में सशस्त्र विद्रोही गतिविधियों से लड़ने के माहौल में एक ख़ास ढाँचे में ढल गया है. दस दिन पहले एक अख़बार के रिपोर्टर को पुलिस ने गिरफ़्तार किया था जिसके बाद पुलिस के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे जिनके बाद राज्य सरकार ने ये दिशा-निर्देश जारी किए हैं. नए दिशा-निर्देशों में 14 ख़ास नियम बताए गए हैं जिनमें पुलिस के लिए यह ज़रूरी बना दिया गया है कि वह किसी भी नागरिक को गिरफ़्तार करने से पहले न्यायिक तौर पर हासिल किया गए वारंट का इस्तेमाल करेगी. दिशा-निर्देश में यह भी व्यवस्था की गई है कि किसी अदालती आदेश के बिना पुलिस किसी भी महिला या बच्चे को हिरासत में नहीं रख सकेगी या उन्हें समन भी नहीं किया जा सकेगा. मुख्यमंत्री कैप्टर अमरिंदर सिंह ने कहा कि नए दिशा-निर्देश को लागू करने के मामले में सरकार सख़्त नीति का पालन करेगी और जो भी पुलिसकर्मी इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करता हुआ पाया जाएगा उसके ख़िलाफ़ सख़्त से सख़्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि हालाँकि अपवाद सिर्फ़ 'कुछ गंभीर और आतंकवाद संबंधित अपराधों के मामले' में ही लागू हो सकते हैं. कैप्टर अमरिंदर सिंह ने कहा कि हालाँकि पंजाब पुलिस एक अनुशासित सुरक्षा बल रहा है लेकिन कुछ ऐसी भी घटनाएँ रही हैं जिनमें कुछ पुलिस अधिकारियों ने अपनी ड्यूटी करते वक़्त क़ानूनी प्रावधानों का पूरा ध्यान नहीं रखा. उन्होंने कहा कि इस तरह की पुलिस कार्रवाइयाँ शायद उस मानसिकता का परिणाम रही हों जो क़रीब दो दशकों तक सिख पृथकतावादियों से लड़ने के दौरान बन गई होगी. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||