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नटवर सिंह तीन दिन के ईरान दौरे पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान में नई सरकार से बातचीत करने के लिए भारत के विदेश मंत्री नटवर सिंह ईरान दौरे पर हैं. तीन दिन की इस यात्रा में भारत-पाकिस्तान-ईरान गैस पाइपलाइन पर बातचीत होने की उम्मीद है. ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन की कुल लंबाई 2600 किलोमीटर की है जिसमें से 760 किलोमीटर पाकिस्तान से होकर गुज़रेगा. इसकी कुल लागत साढ़े सात करोड़ अरब अमरीकी डॉलर है. पाइपलाइन के अलावा ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा होने की भी उम्मीद है. विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान चाहता है कि भारत मध्यस्थ की भूमिका निभाए और ईरान के नज़रिए को पश्चिमी देशों तक पहुँचाए. ईरान के परमाणु मामलों के प्रमुख वार्ताकार अली लारिजानी भी हाल ही में भारत यात्रा पर आए थे. इस दौरान उन्होंने दिल्ली में विदेश मंत्री नटवर सिंह और सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन से मुलाक़ात की थी. अली लारिजानी की भारत यात्रा को ईरान के परमाणु कार्यक्रम के लिए समर्थन हासिल करने की कोशिश से जोड़कर देखा गया था. आईएईए इस बीच आईएईए यानि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि छानबीन के बाद भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई सवाल बने हुए हैं. एजेंसी ने ईरान से कहा है कि ईरान सब मुद्दों पर सफ़ाई दे. रिपोर्ट में कहा गया है कि एजेंसी अभी भी ये बताने की स्थिति में नहीं है कि ईरान में कोई अघोषित परमाणु गतिविधि हो रही है या नहीं. हालांकि रिपोर्ट में ये ज़रूर माना गया है कि ईरान ने यूरेनियम संवर्धन नहीं किया है. ईरान का रूख़ है कि उनके परमाणु कार्यक्रम पर ईयू-3 देश क्यों फ़ैसला कर रहा है, आईएईए क्यों नहीं जिसके बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स में नाटो देशों सहित 35 देश सदस्य हैं. अमरीका और यूरोपीय संघ ईरान पर दबाव बनाए हुए हैं कि वह अपना परमाणु कार्यक्रम तब तक शुरु न करे जब तक आईएईए इसकी अनुमति नहीं देता. ईरान ने दस महीने के बाद इस्फ़हान सयंत्र में पिछले महीने यूरेनियम संवर्धन का काम फिर शुरू कर दिया था. |
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