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गुरुवार, 04 अगस्त, 2005 को 15:37 GMT तक के समाचार
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'लोगों ने माता-पिता को बहुत डराया था'

हर्षा चावड़ा
छह अगस्त को अपना उन्नीसवां जन्मदिन मना रही हैं हर्षा
जन्म दिन किसी के लिए भी एक विशेष अवसर होता है और फिर उनके लिए तो कहना ही क्या जिनका जन्मदिन ही कुछ विशेषता लिए हुए होता है.

हम बात कर रहे हैं हर्षा चावड़ा की जो भारत की पहली टेस्ट ट्यूब बेबी हैं.

छह अगस्त को हर्षा अपना उन्नीसवाँ जन्मदिन मनाया है.

जबसे हर्षा का जन्म हुआ है, यानी छह अगस्त 1986 से, तब से हर वर्ष उनके इंटरव्यू और तस्वीरें अख़बारों में छपती आ रही हैं लेकिन अभी हाल ही जब मैं मुंबई में हर्षा से मिली तो मैंने सोचा उनसे कुछ अंतरंग बातें कर ली जाएँ.

अब आगे की कहानी, हर्षा की ज़ुबानी:

'जब मैं लगभग आठ वर्ष की थी तो मुझे पता चला कि मैं भारत की पहली टेस्ट ट्यूब बेबी हूँ.

 मेरे माता-पिता रूढ़िवादी परिवार से हैं. मुझे पता चला है कि मेरे जन्म से पहले लोग उन्हें डराया करते थे, कहते थे कि मैं अपाहिज पैदा हूँगी या मेरे तीन पैर और तीन हाथ होंगे.
हर्षा चावड़ा

उस समय मुझे इसका अर्थ नहीं मालूम था न ही मुझे यह समझ में आता था कि मेरे हर जन्मदिन पर अख़बार वाले मेरी तस्वीरें खींचने क्यों चले आते हैं.

लेकिन जैसे-जैसे बड़ी होती गई मुझे समझ में आता गया कि मैं एक सामान्य बच्ची नहीं हूँ, मेरा जन्म विज्ञान के माध्यम से हुआ है.

मैंने पाँच वर्षों के प्रयासों के बाद जन्म लिया. यह सब कुछ डॉक्टर इंदिरा हिंदुजा की वजह से संभव हो पाया जो लगातार आईवीएफ़ पर खोज कर रही थीं.

मेरे माता-पिता रूढ़िवादी परिवार से हैं. मुझे पता चला है कि मेरे जन्म से पहले लोग उन्हें डराया करते थे, कहते थे कि मैं अपाहिज पैदा हूँगी या मेरे तीन पैर और तीन हाथ होंगे.

लेकिन जब मैं पैदा हुई तो लोगों ने देखा कि मैं किसी भी सामान्य शिशु की तरह थी.

एकदम से मेरे माता-पिता की ऐहमियत बढ़ गई. लोग दूर-दूर से मुझे देखने आने लगे. कुछ लोग तो लंदन से भी आए थे. शगुन के तौर पर मुझे उपहार भी मिलने लगे.

हमारे गुजराती समाज में आज लोग इस बात पर गर्व करते हैं कि पहली टेस्ट ट्यूब बेबी गुजराती है.

मुझे अपने बारे में लोगों को कुछ बताना अच्छा नहीं लगता. लोग ख़ुद ही पढ़ कर जान लेते हैं.

 मैंने पाँच वर्षों के प्रयासों के बाद जन्म लिया. यह सब कुछ डॉक्टर इंदिरा हिंदुजा की वजह से संभव हो पाया जो लगातार आईवीएफ़ पर खोज कर रही थीं.
हर्षा चावड़ा

कई बार तो लोग मुझे रोक कर पूछते हैं, क्या तुम ही हर्षा चावड़ा हो?

मेरे माँ-बाप ने मुझे बिलकुल आम बच्चों की तरह पाला है. मेरी सहेलियाँ भी मुझसे सामान्य व्यवहार करती हैं.

बस मेरे जन्मदिन पर मीडिया वालों की चहल-पहल रहती है वरना साल के बाक़ी दिन तो मैं सामान्य जीवन जीती हूँ.

मेरी आकाँक्षा है कि आगे चल कर मैं एक डॉक्टर बनूँ ताकि मैं भी लोगों के काम आ सकूँ'.

मैंने हर्षा को उसके आगे आने वाले जीवन के लिए शुभकामनाएँ दीं और उससे विदा ले ली.

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