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ताकि लोग रात में ठीक से सो सकें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सर्वोच्च न्यायालय ने किसी भी सार्वजनिक स्थल पर रात दस बजे से लेकर सुबह छह बजे तक शोर करने वाले उपकरणों के उपयोग पर पाबंदी लगा दी है. इस आदेश के तहत लाउडस्पीकर से लेकर तेज़ आवाज़ वाला संगीत बजाने, पटाखे चलाने और हॉर्न बजाने पर रोक लगा दी गई है. ध्वनि प्रदूषण के ख़िलाफ़ दायर की गई एक जनहित याचिका पर न्यायालय ने यह आदेश दिया है. मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरसी लाहोटी और न्यायमूर्ति अशोक भान के खंडपीठ ने ये आदेश दिए हैं. खंडपीठ ने अपने आदेश में रात के वक़्त किसी भी ध्वनि प्रदूषण करने वाले उपकरण के उपयोग पर रोक लगा दी है. खंडपीठ ने ध्वनि प्रदूषण पर रोक लगाने संबंधी न्यायालय के पहले दिए गए निर्देशों को लेकर पुलिस को कई हिदायतें दी हैं. न्यायालय ने पुलिस को अस्पताल और स्कूलों के समीप प्रेशर हॉर्न के प्रयोग पर भी रोक लगाने के निर्देश दिए हैं. इसके अलावा दीपावली जैसे त्यौहारों पर पटाखों के लिए भी ये नियम सख्ती से लागू करने को कहा गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी के साथ बढ़ती वाहनों की संख्या के चलते ध्वनि प्रदूषण बढ़ा है और शोर का स्तर 40-45 डेसिबल के मान्य स्तर से बढ़कर 60 से 90 डेसिबल तक पहुँच गया है. आमतौर पर माना जाता है कि आदमी 80 डेसिबल तक की ध्वनि को बर्दाश्त की सीमा में होती है. |
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