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मुतवक्किल के भाई की मौत | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के शासनकाल में विदेश मंत्री रहे वकील अहमद मुतवक्किल के भाई पाकिस्तान के शहर क्वेटा में गोली चलने की एक घटना में मारे गए हैं. यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह गोली मौलवी जलील अहमद पर ही चलाई गई थी या दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच लड़ाई में गोली उनके लगी. पुलिस का कहना है कि वह पिछले छह साल से क्वेटा में मौलवी के तौर पर जाने जाते थे. मुतवक्किल हाल ही में अफ़ग़ानिस्तान की राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल हुए हैं और वह सितंबर के संसदीय चुनाव में प्रत्याशी भी हैं. पाकिस्तान के सुरक्षा अधिकारियों ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी से कहा कि मौलवी अहमद की हत्या को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए. क्वेटा के पुलिस अधीक्षक परवेज़ ज़हूर का कहना था, "कल रात दो गुटों के बीच गोलीबारी हुई. हमें पता चला है कि इसमें एक राहगीर मारा गया जिसका नाम जलील अहमद बताया जा रहा है". मुतवक्किल तीन साल नज़रबंद रहे हैं. पहले अमरीकी हिरासत में और फिर काबुल में. अब वह कंधार से संसदीय चुनाव के उम्मीदवार हैं. अफ़ग़ान सरकार ने तालेबान के पुनर्वास का जो काम शुरू किया है उसीके तहत मुतवक्किल भी इस पद के दावेदार बने हैं. वह हालाँकि तालेबान के ज़माने की कई गतिविधियों के लिए शर्मिदंगी नहीं ज़ाहिर करते लेकिन यह ज़रूर कहते हैं कि ओसामा बिन लादेन और उनके साथियों ने अफ़ग़ानिस्तान में तबाही मचाई है. वह कहते हैं कि अब वह लड़कियों की शिक्षा को भी समर्थन देते हैं बशर्ते कि वह अफ़ग़ान संस्कृति के अनुरूप हो. |
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