BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
मंगलवार, 10 मई, 2005 को 13:53 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
'बिठलाहा' के ज़रिए आदिवासी न्याय

अभियुक्त के तहस-नहस घर के सामने सीताराम टुडु
बिठलाहा में शामिल लोगों ने अभियुक्त के घर से सब कुछ उठा लिया
झारखंड का आदिवासी समाज सरकार की न्यायिक प्रक्रिया से बच निकलने वाले अपराधियों को दंडित करने का अपना अधिकार छोड़ने को तैयार नहीं दिखता.

अपराधियों को दंडित करने के लिए संथाल परगना में प्रचलित ऐसी ही एक प्रथा है- 'बिठलाहा'.

प्रशासन जहाँ इस प्रथा के प्रचलन में होने तक की बात स्वीकार नहीं करता, वहीं आदिवासी समाज बिठलाहा के अपने अधिकार को छोड़ने को तैयार नहीं है.

हमने दुमका ज़िले में हुई 'बिठलाहा' की एक घटना की पड़ताल करने पर पाया कि कबायली न्याय की इस व्यवस्था के प्रचलन में होने के पीछे प्रशासन की अकर्मण्यता काफ़ी हद तक ज़िम्मेदार है.

दुमका ज़िले के गरडी गाँव के जॉर्ज फ़्रांसिस किस्कू का दो दिसंबर 2004 को 'बिठलाहा' किया गया.

घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय पत्रकार ज्योति कुमार बताते हैं, "जॉर्ज फ़्रांसिस के घर के पास डुगडुगी बजाते हुए लोग जमा होने लगे. देखते ही देखते चार सौ के क़रीब लोग जुट गए. पहले घर का दरवाज़ा तोड़ा गया और फिर जिसके हाथ जो लगा, वो उठा ले गए."

उन्होंने बताया, "पाँच मिनट के भीतर घर में कोई संपत्ति नहीं बची रह पाई थी. दरवाज़े-चौखट ही नहीं, छत की खपरैल तक उतार ली गई."

अपराध

मैंने 'बिठलाहा' की इस कार्रवाई की शुरूआत कराने वाले सीताराम टुडु से बात की. उन्होंने बताया कि उनकी बेटी फूल कुमारी की गला काट कर हत्या कर दी गई और प्रशासन अभियुक्तों को पकड़ने के लिए कोई कार्रवाई नहीं कर रहा था.

News image
बेटी हत्यारों को सजा दिलाने के लिए सीताराम ने आला अधिकारियों से गुहार लगाई

सीताराम टुडु ने बताया, "मैंने आला पुलिस अधिकारियों, मुख्यमंत्री और यहाँ तक कि राष्ट्रीय महिला आयोग से भी गुहार लगाई. जब 15-16 दिन बीत जाने के बाद भी हत्या के लिए ज़िम्मेदार अपराधी खुलेआम घूमते रहे तो समाज ने बिठलाहा के लिए मांझी हड़ाम (प्रधान) से गुहार लगाई."

उन्होंने बताया, "मांझी हड़ाम ने दो अभियुक्तों सहदेव हेम्ब्रम और जॉर्ज फ़्रांसिस किस्कू के 'बिठलाहा' का फ़ैसला सुनाया. इलाक़े के 10 गाँव के लोगों ने इन दोनों के बिठलाहा में भाग लिया."

सीताराम टुडु कहते हैं कि बिठलाहा क़ानूनी है या ग़ैरक़ानूनी ये उन्हें पता नहीं. उन्होंने कहा, "प्रशासन की पकड़ से छूटे अपराधियों को सजा देने का यही तरीका है. मेरी पुत्री की हत्या मामले में तीसरे अभियुक्त छोटो मुर्मू का भी बाद में पता चला है. प्रशासन ने कुछ नहीं किया तो उसका भी 'बिठलाहा' किया जाएगा."

नहीं-नहीं

हालाँकि पूरे दुमका ज़िले को बिठलाहा की इस घटना की जानकारी है लेकिन प्रशासन अब भी इस बात को मानने को तैयार नहीं.

News image
हँसडीहा थाने में 'बिठलाहा' की घटना को दंगे के रूप में दर्ज किया गया है

ज़िले के हँसडीहा थाने के प्रभारी चंद्रेश्वर गरडी गाँव की घटना के बारे में कहते हैं, "घटना नाजायज़ मजमे का है, बिठलाहा का नहीं."

हालाँकि वह स्वीकार करते हैं फ़्रांसिस एक घोषित अपराधी है और विस्फोटकों से जुड़े एक मामले में जेल जा चुका है.

चंद्रेश्वर प्रसाद कहते हैं, "बिठलाहा के बारे में किसी सुगबुगाहट की जानकारी हमें अपने चौकीदारों से मिल ही जाती है. जानकारी मिलते ही हम पुलिस की तैनाती कर हरसंभव प्रयास करते हैं कि किसी का बिठलाहा न हो."

परंपरा का सवाल

उल्लेखनीय है कि आदिवासी समाज के बुद्धिजीवी भी बिठलाहा प्रथा पर पूर्ण रोक के पक्ष में नहीं हैं.

News image
रसिक वासुकी 'बिठलाहा' प्रथा को आदिवासी परंपरा का अभिन्न अंग मानते हैं

आदिवासी सामाजिक शिक्षा सांस्कृतिक संघ के सचिव रसिक वासुकी कहते हैं, "भूरिया समिति रिपोर्ट के अनुसार आदिवासी परंपरा और नियम-क़ानून को सरकारी स्तर पर पूर्ण मान्यता है. 'बिठलाहा' प्रथा हमारे संथाल समाज में क़ानून-सम्मत है."

वो मानते हैं कि जॉर्ज फ़्रांसिस का 'बिठलाहा' थोड़ी जल्दबाज़ी में किया गया और पूरी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.

लेकिन उनकी स्पष्ट राय है, "लूटपाट को नाजायज़ कहा जा सकता है. लेकिन सामाजिक बहिष्कार का हक़ हमें होना ही चाहिए. हमारा अस्तित्व हमारी परंपराओं पर निर्भर है. प्रशासन इसे माने या नहीं, कोई फ़र्क नही पड़ता."

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>