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'भारतीय निवेशकों को अभी अनुमति नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ ने कहा है कि जब तक कश्मीर पर प्रगति नहीं होती, भारतीय कंपनियों के पाकिस्तान में निवेश पर रोक जारी रहेगी. मलेशिया के दौरे पर गए प्रधानमंत्री अज़ीज़ ने क्वालालम्पुर में ये विचार व्यक्त किए. हालाँकि उन्होंने अन्य देशों से पाकिस्तान में निवेश बढ़ाने की अपील की. प्रधानमंत्री अज़ीज़ ने कहा कि इस बात को लेकर आशान्वित हैं कि भारत के साथ संबंध सुधर रहे हैं. उन्होंने कहा, "दोनों देशों के बीच माहौल सुधर रहा है. व्यापार बढ़ा है और हम उम्मीद करते हैं कि दूसरे क्षेत्रों में भी आर्थिक सहयोग बढ़ेगा- चाहे वो निवेश का मामला हो या चाहे मुक्त व्यापार." संवाददाताओं का कहना है कि हालाँकि पाकिस्तान ने भारत की ओर से निवेश पर कोई औपचारिक पाबंदी नहीं लगाई है लेकिन उसने ऐसे किसी प्रस्ताव को मंज़ूर भी नहीं किया है. मुद्दा प्रधानमंत्री अज़ीज़ ने कहा, "मुद्दा जटिल है और इसमें तीन पक्ष शामिल हैं- पाकिस्तान, भारत और कश्मीरी लोग. इस मुद्दे को सुलझाने के लिए तीनों को उदारता, साहस और नेतृत्व क्षमता दिखानी होगी." उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था उदार है और कोई ऐसा क्षेत्र नहीं जहाँ विदेशी निवेशकों पर रोक हो. प्रधानमंत्री अज़ीज़ ने कहा कि भारत को निवेश की अनुमति दी जाए इसके पहले वे चाहेंगे कि सभी मुद्दों पर प्रगति हो. उन्होंने कहा कि अगर कश्मीर विवाद में शामिल तीनों पक्ष ईमानदारी से बातचीत करें तो उन्हें भरोसा है कि कश्मीर मुद्दा हल हो जाएगा. प्रधानमंत्री अज़ीज़ ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम की जाँच की सहायता के लिए पाकिस्तान परमाणु भट्ठी के कल-पुर्ज़े संयुक्त राष्ट्र के पास भेज सकता है. अभी तक पाकिस्तान कल-पुर्ज़े भेजने से इनकार किया था. पाकिस्तानी परमाणु कार्यक्रम के पूर्व प्रमुख अब्दुल क़दीर ख़ान ने पिछले साल ये स्वीकार किया था कि उन्होंने ईरान, लीबिया और उत्तर कोरिया को परमाणु तकनीक दी थी. |
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